logo

'बिहार-UP के हिंदी भाषी लोग टॉयलेट...' सुशील कुमार मोदी की लालू-नीतीश से मांग, दयानिधि की पार्टी को गठबंधन से निकालें

a1211.jpeg

द फॉलोअप डेस्क:

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सांसद दयानिधि मारन के यूपी-बिहार के हिंदी भाषी लोगों पर दिए गए आपत्तिजनक बयान पर सियासत गरमा गई है। दयानिधि मारन की टिप्पणी की निंदा करते हुए बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आत्मसम्मान बचा हो तो डीएमके को आईएनडीआईए गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। सुशील कुमार मोदी ने कहा कि ये (दयानिधि) लोग उत्तर औऱ दक्षिण के मसले पर विभाजन पैदा करना चाहते हैं। 

 

गृह राज्यमंत्री ने दयानिधि मारन की आलोचना की
दयानिधि मारन के बयान पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दयानिधि मारन जैसे लोग देश को नॉर्थ-साउथ के मसले पर विभाजन पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की वैसी सबी राजनीतिक पार्टियां जो आईएनडीआईए गठबंधन का हिस्सा है, उन्हें डीएमके सांसद के बयान पर विरोध जताना चाहिए। उन्होंने कहा कि दयानिधि मारन का बयान बहुत विवादास्पद है। जहां प्रधानमंत्री एक ओर "सबका साथ, सबका विकास" का नारा देते हैं वहीं कुछ लोग देश को नॉर्थ और साउथ के विषय पर बांटना चाहते हैं। लेकिन ऐसा होगा नहीं। 

बीजेपी ने बयान को विभाजन पैदा करने वाला बताया
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि फिर से डिवाइड एंड रूल का गंदा खेल खेला जा रहा है। पहले राहुल गांधी ने उत्तर भारतीय मतदाताओं का अपमान किया। रेवंथ रेड्डी ने बिहार के डीएनए पर सवाल उठाया। डीएमके सांसद सेंथिल कुमार ने उत्तर भारतीय राज्यों को गोमूत्र राज्य कह दिया। अब दयानिधि मारन ने हिंदी भाषी लोगों का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लालू यादव और तेजस्वी यादव को इस पर स्टैंड लेना चाहिए। 

दयानिधि मारन ने यूपी-बिहार के हिंदीभाषी लोगों को क्या कहा
बता दें कि डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने हिंदी बनाम अंग्रेजी को लेकर कहा कि हमारे यहां के अंग्रेजीदां लोग अच्छी नौकरियां करते हैं जबकि बिहार और यूपी के हिंदीभाषी लोग यहां (तमिलनाडु) में आकर सड़कें और भवन निर्माण में मजदूरी करते हैं। टॉयलेट साफ करते हैं। मैं उन राज्यों से आग्रह करता हूं कि शिक्षा का स्तर पढ़ाएं। अपने लोगों को सिखाएं कि क्या और कैसे बोलना है? दयानिधि मारन के इस बयान की जमकर आलोचना हो रही है।