द फॉलोअप डेस्क:
भगवान श्री कृष्ण (Sri Krishna) का गायों से उनके बचपन से ही अलौकिक और भावपूर्ण रिश्ता रहा है। द्वापरयुग का रिश्ता कलयुग में भी बरकरार है। इसलिए तो भगवान श्री कृष्ण की नगरी द्वारका में भगवान के दर्शन करने आई 25 गायों के लिए आधी रात में द्वारिकाधीश के गर्भगृह का दरवाजा खोला गया। ऐसा द्वारका के इतिहास में शायद पहली बार हुआ है। लंपी वायरस के मात देकर ये गायें अपने मालिक के साथ 450 किमी की पैदल यात्रा कर कच्छ से द्वारका पहुंची थीं। इनके स्वागत के लिए हजारों लोग मौजूद थे।

भगवान श्री कृष्ण से मांगी मन्नत
कच्छ में रहने वाले महादेव देसाई के गोशाला में रहनी वाली 25 गायें लंपी वायरस से संक्रमित हो गई थी। उस वक्त सौराष्ट्र में इस वायरस से कई गायों की मौत हो रही थी। इसी दौरान गायों के मालिक महादेव देसाई ने भगवान श्री कृष्ण से मन्नत मांगी थी कि अगर उनकी गायों इस वायरस से लड़ कर ठीक हो जाती है तो वो अपनी 25 गायों के साथ कच्छ से पैदल चलकर द्वारका आकर उनके दर्शन करेंगे। गायों के ठीक होने पर उन्होंने ठीक ऐसा ही किया और वो द्वारियाधीश के दर्शन के लिए पहुंचे।

20 से 25 दिन में ठीक हुई गायें
महादेव देसाई ने बताया कि उन्होंने सबकुछ भगवान पर छोड़ा और अपनी गायों की सेवा में लग गए। लगभग 20 से 25 दिन बाद उनकी गायें पूरी तरह स्वस्थ हो गई। इतना ही नहीं गोशाला में रह रही अन्य गायें इस वायरस के संक्रमण में नहीं आई। इनके पूरे तरीके से स्वस्थ हो जाने के बाद मैं पैदल इन्हें लेकर द्वारिका पहुंचा हूं।

दर्शन के बाद किया मंदिर की परिक्रमा
मंदिर प्रशासन के लिए सबसे बड़ी समस्या यह थी कि दिन के समय 25 गायों को गर्भगृह में कैसे दर्शन करवा पाएंगे। क्योंकि दिन के समय में लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते है। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह संभव नहीं दिख रहा था। फिर ऐसा सोचा गया कि भगवान श्री कृष्ण तो गायों के ही भक्त थे तो उन्हें रात में दर्शन करवा सकते है। ठीक उसी प्रकार गायों के लिए रात में मंदिर का दरवाजा खोला गया। गायें मंदिर पहुंच सबसे पहले भगवान के दर्शन किए उसके बाद मंदिर की परिक्रमा भी की। उसके बाद प्रसाद भी ग्रहण किया।वहीं मंदिर के पुजारियों ने भगवान के प्रसाद के अलावा इनके लिए चारे और पानी की भी व्यवस्था की थी।