द फॉलोअप टीम, रांची:
शहीद अनंत लक्ष्मण कन्हेरे (Anant Laxman Kanhere)। एक ऐसा नाम जिसके रोम-रोम में देशभक्ति उछालें मारा करती थीं। अभी किशोर ही था वो, जवानी के पायदान पर कदम ही रखे थे कि भारत माता की खातिर शहीद हो गया। इस क्रांतिकारी का जन्म 21 दिसंबर 1891 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के खेड़ा तालुका के अंजनि गांव में हुआ। कुछ लोगों का मानना है कि जन्म इंदौर में ही हुआ था। शुरुआती पढ़ाई निजामाबाद (वर्तमान इंदौर) में की। आगे की शिक्षा के लिए वे अपने मामा के पास औरंगाबाद चले गए। तब दो राजनीतिक विचारधाराएँ स्पष्ट रूप से उभर रही थीं। कांग्रेस भारतवासियों के लिए अधिक से अधिक अधिकारों की मांग करती लेकिन अंग्रेज़ सरकार उपेक्षा करती जाती थी। दूसरी ओर युवा क्रांतिकारी सशस्त्र विद्रोह से अंग्रेज़ों की सत्ता उखाड़ना चाहते थे।
हर वर्ग, समुदाय के लोग देश की आजादी में कूद पड़े थे। लेकिन अंग्रेजों को एकजुटता सुहा नहीं रही थी। हिन्दू और मुस्लिमों में मतभेद पैदा करने के लिए अंग्रेज सरकार ने 1905 में 'बंगाल का विभाजन' कर दिया। इसके बाद महाराष्ट्र में 'अभिनव भारत' नाम का युवकों का संगठन बना। वे अखाड़ों के माध्यम से वे क्रान्ति की भावना फैलाने लगे। विनायक सावरकर और गणेश सावरकर इस संगठन के प्रमुख व्यक्ति थे। अनन्त लक्ष्मण कन्हेरे भी इस मंडली में शामिल हो गए।
अनंत ने छोटी उम्र में ही आजादी के लिए कई क्रांतिकारिक संगठनों के साथ काम करना शुरू कर दिया था। अनंत की क्रांतिकारी गतिविधियों की निगरानी के लिए जैक्सान नामक एक ब्रिटिश अफसर ने उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश शुरू कर दी। इधर वर्ष 1909 में विदेशी सरकार के विरुद्ध सामग्री प्रकाशित करने के अभियोग में जब गणेश सावरकर को आजन्म कारावास की सज़ा हो गई तो क्रान्तिकारी और भी उत्तेजित हो उठे। उन्होंने नासिक के ज़िला अधिकारी जैक्सन से इसका बदला लेने का निश्चय कर लिया। कन्हेरे ने इस काम करने का जिम्मा अपने ऊपर लिया। इरादा था कि जैक्सकन को गोली मारकर खुद को भी गोली मार लेंगे।

पिस्तौल का इंतजाम किया गया। 21 दिसम्बर, 1909 को जब जैक्सन एक मराठी नाटक देखने के लिए आ रहा था, तभी कन्हेरे ने जैक्सन की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके पहले कि वो वहां से भाग पाते उन्हें अंग्रेज पुलिस ने पकड़ लिया। जैक्सन की हत्या के बाद अंग्रेज़ पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी की। अनेक गिरफ्तारियाँ हुईं और मुकदमे चले। जैक्सन की हत्या के मामले में अनंत लक्ष्मण कन्हेरे, धोंडो केशव कर्वे और विनायक देशपाण्डे को फ़ांसी की सज़ा हुई। दूसरे मुकदमें में राजद्रोह फैलाने के अभियोग में 27 लोगों को सज़ा मिली, जिनमें विनायक सावरकर को आजन्म क़ैद की सज़ा हुई। अनंत लक्ष्मण कन्हेरे 11 अप्रैल,1910 को केवल 19 वर्ष की उम्र में फ़ांसी पर लटका दिये गए। इतनी छोटी-सी आयु में ही शहीद होकर भारत माँ के इस लाल ने भारतीय इतिहास में अपना नाम अमर कर लिया। अनंत पर एक फिल्म भी बनी है, जो 10 जनवरी 2014 को रिलीज हुई।