logo

अगर कांग्रेस ने नहीं छोड़ी मुस्लिमपरस्ती तो 2024 में आएंगे तो मोदी ही, प्रियंका को सौपें कमान: प्रमोद कृष्णन

9246news.jpg
द फॉलोअप टीम, नई दिल्ली:

प्रियंका गांधी की सलाहकार कमेटी के सदस्य और वरिष्ठ नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन कांग्रेस के ऐसा चेहरा हैं, जो अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम वर्ग में ससम्मान स्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा कि देश में हिन्दू धर्म की लहर है। भाजपा उसी के बल पर सत्ता में है। कांग्रेस को बदलना होगा खुद को, जभी जीत की संभावना बलवती होगी। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और बंगाल में ममता बनर्जी की उन्होंने मिसाल दी है। 

प्रमोद कृष्णन बोले कि केजरीवाल की सभा बिना भारत माता की जय, बजरंगबली की जय और वंदे मातरम के नहीं होती। बंगाल में ममता बनर्जी ने इस चुनाव में अपने ऊपर 'मुस्लिम परस्त' होने का ठप्पा नहीं लगने दिया। चंडीपाठ समेत अपने अन्य व्यवहार से लोगों के मन में बिठा पाने में सफल रहीं कि वह बीजेपी नेताओं से बड़ी हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि  कांग्रेस पार्टी अपनी विचारधारा भी रखे, लेकिन भाजपा द्वारा स्थापित इस धारणा को तोड़ना होगा कि वह हिंदू विरोधी पार्टी है। उन्होंने पार्टी की कमान प्रियंका गांधी को सौंपने की मांग भी की है।

2014 में ही किया गया था आगाह
प्रमोद कृष्णन ने कहा कि  2014 लोस चुनाव के परिणाम के बाद कांग्रेस ने अपनी हार की समीक्षा के लिए एके एंटनी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। तब ही कमेटी ने आगाह किया था कि पार्टी का अल्पसंख्यकों के प्रति जरूरत से ज्यादा झुकाव पराजय का सबब बना। बहुसंख्यक हिंदुओं को कथित 'मुस्लिम परस्ती' रास नहीं आई। दो लोकसभा चुनाव हो गए। कई राज्यों में चुनाव हो गए। पहले होती थी मुस्लिम वोट की सियासत, अब हिन्दू वोट का दबदबा है।

कांग्रेस को असम में मौलाना बदरुद्दीन अजमल, बंगाल में फुरफुरा शरीफ के पीरजादा और केरल में मुस्लिम लीग से गठबंधन करना अब किसी लाभ का नहीं। इससे हिंदू वोटों ध्रुवीकृत हो गया। भाजपा यह स्थापित करने में कामयाब रही है कि वो एकमात्र हिंदुओं की पार्टी है और कांग्रेस मुसलमानों की।


हिंदुत्व की लहर पर सवार नरेंद्र मोदी 
प्रमोद कृष्णन बोले हैं कि कांग्रेस को अपने रंग-ढंग बदलने होंगे। उसे साबित करना होगा कि भाजपा का हिंदुत्व ढोंग है। कांग्रेस ही देश की प्राचीन सनातन परंपरा की रक्षा कर सकती है। यदि ऐसा नहीं किया तो 2024 में सारे जन मुद्दे स्वाहा हो जाएंगे और हिंदुत्व की लहर पर सवार नरेंद्र मोदी फिर से सत्तारूढ़ हो जाएंगे। जबकि मोदी अपने सात साल के कार्यकाल में हर मोर्चों पर फेल साबित हुए हैं। लेकिन वोटर अभी धर्म के नशे में हैं, जो अफीम के समान है।