मनोज पांडेय, रांची:
सामने गिरती दीवार और उसपर खिले मेरे भाई के अक्षर। कानून की नजर में हम भले ही गलत हों लेकिन आज वो भी तो गुनहगार हैं, जिन्होंने हमारे सपने तोड़ दिये। मेरे पिता उतने पढ़े लिखे नहीं हैं। आसपास के लोगों ने कहा थोड़ा पैसा देकर जमीन ले लो। पिता ने भी वैसा ही किया। जब घर बना था, हम खुश थे। घर पर पूजा भी हुई थी। राजधानी में अब अपना भी कोई पता होगा। लेकिन आज फिर हम सड़क पर हैं। हमारा पता खत्म हो गया। मेरा छोटा भाई समझ नहीं पा रहा कि क्यों मोहल्लेे के सारे घर बुलडोजर लगाकर पुलिस तोड़ रही है। वो बस दुखी है। मां पेड़ के किनारे खड़ी है। उसकी आंखों में आंसू है, लेकिन जुबान बंद है। हम गलत हो सकते हैं, हमारा घर भी गलत हो सकता है, लेकिन क्या हम जैसे गरीबों को पहले घर देकर फिर नहीं तोड़ा जा सकता था। सरकार सभी को घर दे रही है, मेरे परिवार को पता भी नहीं है उसके लिए कौन सा फॉर्म भरना है। कोई बताता भी नहीं है। आज हमारे सर से छत छिन गई। यह सिर्फ घर नहीं था। हमारा सपना था, जिसे तोड़ दिया गया। इसकी सज़ा क्या होगी साहब!

क्या
आप अमीर हैं इसलिए आपको हमारा दर्द महसूस नहीं होगा
जब भगवाने ने मुझे एक ठेले वाले के घर जन्म दिया जबकि मेरे कुछ दोस्तों को अमीर घर में तो क्या भगवान ने हमारे साथ अत्याचार नहीं किया। धरती पर आते ही क्यों कोई अमीर तो कोई गरीब हो जाता है। कोई थाली में भात छोड़ देता है, जितना हमें नसीब नहीं होता। सबको बराबर करो, सबको घर दो। खाना दो, नौकरी दो, अच्छा कपड़ा दो।द्य कोई आवेदन दे कर तो गरीब नहीं बना। सरकार कहती है हम गरीबों की सुनेंगे। आज कौन है सुननेवाला। मेरा नाम पूछते हैं, मेरा नाम जान कर क्या कीजिएगा। पेपर में छाप दीजिऐगा, उससे क्या होगा। हमारे परिवार की यही अब पहचान है कि हम गरीब हैं और गरीब ही मर जायेंगे।
सारी बातें उस लड़की ने कही हैं, जिसका घर आज टूट गया। उसने अपना नाम तो नहीं बताया लेकिन बातचीत से लगा वे अच्छे कॉलेज में पढ़ी-लिखी है।
चार मजिस्ट्रेट और दो सौ पुलिसकर्मियों ने कराया अतिक्रमण मुक्त
उस लड़की के कई सवालों का जवाब हमारे पास भी नहीं था। लिहाजा हम भी मौन हो गये और वहां से बैरंग लौट आए। दरअसल कांके डैम की अतिक्रमित जमीन को मुक्त करने के संबंध में 90 से ज्यादा लोगों को नोटिस दिया जा चुका है। उसी कड़ी में रांची जिला प्रशासन ने अतिक्रमण मुक्त अभियान के लिए चार मजिस्ट्रेट और दो सौ पुलिसकर्मियों को लगाया है। इसके अलावा गोंदा, सुखदेव नगर पंडरा ओपी के थानेदारों को भी अभियान में शामिल होने के निर्देश दिये गये हैं।
सहमे हुए हैं कई मोहल्ले के लोग
डैम किनारे के लेक एवेन्यू, कटहल गोंदा और सरोवर नगर समेत आसपास के दूसरों मुहल्लों के लोग सबसे अधिक सहमे हुए हैं। 1960 के दशक में कांके डैम के अस्तित्व में आने के बाद से ही कांके डैम के आसपास के इलाकों पर अतिक्रमणकारियों की नजर लगती रही है। तकरीबन 452 एकड़ क्षेत्र वाले इस डैम के 12 से 15 एकड़ की जमीन पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है।