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महज 50 रुपए में अंजुमन अस्पताल में जांच, 5 साल में करीब 1500 मरीजाें का हाे चुका मुफ्त इलाज

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अंजुमन अस्पताल की 1.30 करोड़  में बदल गयी सूरत, नए ओपीडी, नई गायनी, वार्ड नए समेत जांच की नई मशीन 

सैयद शहरोज़ कमर, रांची:
सन 1978 से कोंनका रोड में महज़ एक कमरे से शुरू हुआ अंजुमन अस्पताल आज 5 मंजिला इमारत में आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों का बेहद सस्ते दर पर इलाज कर रहा है। अध्‍यक्ष इबरार अहमद, उपाध्‍यक्ष मंजर इमाम और महासचिव हाजी मुख्‍तार अहमद की अगुवाई वाली अंजुमन इस्लामिया की टीम की सक्रियता से अस्पताल की न महज़ रंगत बदली है, बल्कि सीरत और सूरत भी बदली है। मात्र 50 रुपए में स्वास्थ्य और चिकित्सा जांज डॉक्टर्स करते हैं। वहीं वंचित क़रीब 1500 लोगों का मुफ्त इलाज पिछले 5 साल में हो चुका है।



बाहर से बहुत ही कम पैसे में होता है ऑपरेशन
ज़कात फंड से इलाज और दवा में मदद की जाती है। वहीं रांची के अन्य प्राइवेट अस्पतालों से बहुत ही कम दरों पर यहां छोटे सी बड़ी सफल सर्जरी की जाती है। कांटा टोली की हसमुन खातून की अपेंडिक्स और लीवर का ऑपरेशन यहां महज़ 70 हज़ार में हुआ। जबकि दूसरी जगह इसके पौने दो लाख रुपए लगते। लीवर का कुछ हिस्सा इनका सड़ चुका था। अस्पताल संचालन समिति के संयुक्त सचिव मोहम्मद नजीब ने बताया कि इधर 2 केस हिप रिप्लेसमेंट औऱ 10 केस पैर में रॉड लगाने के आये। सभी से रियायत फी ली गयी। वहीं 500 से अधिक मरीज़ आयुष्मान भारत के तहत यहां से सुगम इलाज करा चुके हैं। 3 एम्बुलेंस और एक मय्यत वाहन की भी सहूलियत अस्पताल में है।



सेवा में टीम रहती है तैनात
सेवा में 7 पुरुष और 3 महिला चिकित्सक के अलावा  नर्स और दूसरे 20 सहायक कमर्चारियों के साथ संचालन कमेटी के क़रीब 10 लोगों की टीम तैनात रहती है। इनमें  सीएमओ डॉ सैयद इक़बाल, सचिव शहजाद बबलू, संयुक्त सचिव मोहम्मद नजीब, सदस्य मोहम्मद जावेद, मोहम्मद अफ्फान, मोहम्मद तौकीर, मोहमद ज़फर, मोहम्मद मोहशीन और मोहम्मद ग्यासुद्दीन मुन्ना शामिल हैं।



क्या क्या हुए बदलाव
तीन कमरों और एक ओसारे का नया ओपीडी, महिलाओं की जांच के लिए दो कमरे और एक हॉल का निर्माण 20 लाख में हुआ। जबकि सीओ 2 नाम की मशीन 8 लाख रु, इतने ही लागत में सीआर्म आर्थो एक्सरे नए ढंग का हड्डी जोड़ने के समय काम आएगा, लैप्रोस्कोपी सर्जरी के लिए लेज़र कैमरा से ऑपरेशन करने के उपकरण 16 लाख रु, लिफ्ट समेत कंस्ट्रक्शन 32 लाख में लगी है। वहीं 33 लाख में एसी और टीवी से लैस 11 रूम को किया जा रहा है। लैब भी अस्पताल का अपना है अब। आईसीयू को भी आधुनिक सुविधाओं से सज्जित किया जा रहा है। वहीं पुराने ओपीडी की तरफ रेनोवेशन में क़रीब 13 लाख खर्च होने का अनुमान है।



68 में 67000 रु में खरीदी गई थी ज़मीन
वरिष्ठ सोशल एक्टिविस्ट हुसैन कच्छी ने बताया कि शहर के प्रमुख लोगों की राय से 1968 में आपसी चंदे से जमा 67000 रुपए से अस्पताल के लिए जमीन खरीदने का निर्णय हुआ। तब अंजुमन के सदर खान हबीबुर्रहमान, सचिव सैयद अनवर हुसैन, कोषाध्यक्ष क़ासिम हारून कच्छी थे। मरहूम मोहम्मद हबीब के सचिव रहते ज़मीन खरीदी गई। हुसैन ने कहा कि उनके पिता क़ासिम हारून ने एक वार्ड बनाने का वादा किया था। लेकिन जब उनकी मौत 74 में हो गयी तो अगले साल तत्कालीन सचिव अब्दुल वाहिद अंसारी ने मुझसे वालिद के वादे को याद कराया। हमने एक हॉल का निर्माण पूरा कर वार्ड अंजुमन के सुपुर्द कर दिया। इसी में हलीमुद्दीन की टीम ने ओपीडी की शुरुआत की।