मनोज पांडेय, रांची:
प्रचलित कहावत है कि सोने की लूट, कोयले पर छापा। इस कहावत को झारखंड सरकार चरितार्थ कर रही है। गत एक वर्ष से सोना को छोड़ कोयले को ढूंढ़ा जा रहा है। झारखंड की सबसे बड़ी कपड़ा मिल ओरियंट क्राफ्ट पर ताला लग गया है। रांची स्थित इस कंपनी की दोनों इकाइयों में उत्पादन अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। सरकारी तंत्र भी इतना लापरवाह है कि निकट भविष्य में कंपनी के खुलने की संभावना पर ग्रहण लगता दिखा रहा है। खेलगांव और इरबा स्थित दोनों यूनिटों को मिलाकर साढ़े तीन हजार कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। अभी वे कर्मचारी कहां है। क्या कर रहें हैं। इसकी जानकारी किसी को नहीं है और कोई इसे जानने को इच्छुक भी नहीं है।
नई सरकार में नई बात करो छोडो बात पुरानी
हेमंत सरकार इस बात पर अपनी पीठ थपथपा रही है कि झारखंड की 12 हजार महिलाओं को कपड़ा मिल में नौकरी देने जा रही है। कोयंबटूर की केपीआर मिल्स लिमिटेड में इन्हेंं नौकरी मिलेगी। श्रम विभाग के सबसे बड़े हाकिम इस बात को पूरी ताकत से कहते हैं कि 22 फरवरी को एमओयू होगा 12 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलेगा आवास और भोजन की सुविधा भी मिलेगी।
सब्सिडी नहीं मिलना कारखाना बंद होने का कारण
जब फॉलोअप की टीम ने ओरियंट क्राफ्ट कंपनी के बंद होने के कारण को पता लगाने की कोशिश की तो पता चला कि सरकार द्वारा झारखंड की टेक्सटाइल पॉलिसी के तहत तय सब्सिडी एक साल (बंद होने से पहले) से नहीं दी जा रही थी। हालांकि, कोरोना के कारण भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार से मांग में कमी आई है। लेकिन मांग की कमी से कंपनी बंद होना दूसरा कारण है। ज्ञात हो कि झारखंड सरकार की टेक्सटाइल प़ॉलिसी के तहत झारखंड में कपड़ा उत्पादन करने वाली कंपनियों के एक झारखंड को नौकरी देने के एवज में सात साल तक हर महीने पांच हजार रुपए देने का प्रावधान है।
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2400 करोड़ रुपए का किया था निवेश
1978 में गठित हुई इस कंपनी की देश भर में कई यूनिट है। ओरियंट कपड़ा मिल ने झारखंड में 2400 करोड़ रुपये का निवेश किया था। रघुवर दास के शासनकाल में इस कंपनी की स्थापना हुई थी। रघुवर दास द्वारा 2017 में किए गए बहुप्रचारिक मोमेंटंम झारखंड के बाद कंपनी की स्थापना हुई थी। इसकी दो यूनिटें लगी थीं। यहां तैयार होने वाले कपड़े कई दूसरे देशों में भेजे जाते थे। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और कई यूरोपीय देशों में यहां के कपड़े एक्सपोर्ट होते थे।
अरविंद मिल, किशोर एक्सपोर्टस ने आधे कर्मचारियों को मना किया
रांची में स्थित दो और बड़ी कपड़ा मिलों ने भी कंपनी के आधे कर्मचारियों को हटा दिया है। नामकुम के पास रामपुर स्थित अरविंद मिल में दो हजार कर्मचारी काम करते थे। अभी केवल पांच सौ लोगों को काम करने के लिए कहा गया है। ओरमांझी स्थित किशोर एक्सपोर्टस में 1500 कर्मचारी काम करते थे। अभी 650 को छोड़कर बाकी सबको हटा दिया गया है। इन दो कंपनियों में अब तक 2350 कर्मचारी बेरोजागार हो गए हैं। यानी रांची की कपड़ा मिलों पर संकट गहराने से पांच हजार से भी अधिक लोग बेरोजगार हो गए हैं। इन बेरोगार हुए कर्मचारियों की चिंता कोई नहीं कर रहा लेकिन नये को वे भी बाहर नौकरी दे कर अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश हो रही है।