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ईडब्ल्यूएस श्रेणी को आरक्षण के मानदंडों पर विचार करेगी केंद्र सरकार द्वारा गठिति समिति, जानें पूरा मामला

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द फॉलोअप टीम, दिल्ली: 

केंद्र सरकार ने एक समिति का गठन किया है। समिति आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण देने के मानदंडों की समीक्षा करेगी। गौरतलब है कि सरकार ने पिछले हफ्ते ही सुप्री कोर्ट को इस बाबत सूचित किया था। कहा था कि उसने इन मानदंडों पर फिर से विचार करने का फैसला किया है। समिति में तीन सदस्यों को शामिल किया गया है। ये लोग कौन हैं जानते हैं। 

केंद्र द्वारा गठिति समिति में कौन-कौन शामिल
केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति में पूर्व वित्त सचिव अजय भूषण पांडे, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव वीके मल्होत्रा औऱ सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार संजय सान्याल शामिल हैं। समिति को तीन सप्ताह के भीतर काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है। काम पूरा करके समिति सरकार को रिपोर्ट पैश करेगी जिसकी बाद में समीक्षा की जायेगी। 

ईएसडब्ल्यू वर्ग के आऱक्षण की व्यवस्था
गौरतलब है कि मंगलवार को जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में सामाजिक न्याय और आधिकारिक मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के निर्धारण के मानदंडो के अनुच्छेत-15 की व्याख्या पर फिर से विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आश्वासन के मुताबिक एक समिति का गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए समिति मानदंडों का निर्धारण पर विचार करेगी। बता दें कि ये आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की पहचान के लिए देश में अब तक अपनाये गये विभिन्न दृष्टिकोणों की जांच करेगी और भविष्य में कमजोर वर्गों की पहचान के लिए अपनाये जाने वाले मानदंडों की सिफारिश करेगी। 

छात्रों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
बता दें कि शीर्ष अदालत छात्रों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिसमें मौजूदा अकादमिक वर्ष के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-पीजी) में चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए दाखिले में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी आऱक्षण उपलब्ध कराने के लिए केंद्र तथा मेडिकल काउंसिलिंग कमिटि के 29 जुलाई वाले नोटिस को चुनौती दी गई है।