logo

अखिलेश के दौर में जल उठा बल्‍ब कब तक रोशन कर सकेगा उत्‍तर प्रदेश! UP से एक आकलन

10014news.jpg
हफ़ीज़ किदवई, लखनऊ:
एक समय था यूपी बिजली के लिए हाथ फैलाता था,फिर एक समय आया जब यही प्रदेश सर तानकर बिजली दूसरों को भी देने लायक हो गया। गांव तो छोड़िए, शहरों में लाइट मुश्किल थी,मगर वह  वक़्त भी आया, जिससे रात में गांव भी जगमगा गए। हम लोग बचपन में अपने गांव में सोचते थे कि क्या कभी गांव में रात कुछ देर से हो पाएगी, क्या हम भी देर रात तक बल्ब की रौशनी में पढ़ पाएँगे या देर रात में दूरदर्शन पर आने वाली फिल्में देख पाएँगे, यह उस वक़्त तो नहीं हुआ, मगर धीरे-धीरे हमारे सामने यह ख़्वाब सच होता चला गया। इस बात पर यकीन हो गया कि उत्तर प्रदेश के गाँव 24 घण्टे की लाईट पाने लगते अगर उन्होंने वापिस अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया होता। क्योंकि ऊर्जा के क्षेत्र में आजतक शायद ही किसी मुख्यमंत्री ने इतने कम समय में इतने अधिक काम किये हों।

कई ताप योजनाओं का तब हुआ आगाज
अभी पुरानी खबरें उठाकर देखने लगे, तब अखिलेश यादव के काम की अहमियत समझ आई। आप जान लीजिए, ऊर्जा मंत्रालय उन्होंने अपने पास ही रखा था ताकि उनके काम में ज़रा भी हीला हवाली न होने पाए। अपने कार्यकाल की शुरआत मे ही 3140 मेगावाट वाली पांच यूनिटों का लोकार्पण किया। वहीं 2640 मेगावाट की दो तापीय परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। उनका मानना था कि इन परियोजनाओं से वर्ष 2020 से भरपूर बिजली मिलने लगेगी, जोकि सच साबित हुआ। राज्य विद्युत उत्पादन निगम की 660 मेगावाट हरदुआगंज विस्तार परियोजना के प्रदूषण को न्यूनतम रखने के लिए देश में लगने वाले पहले अत्याधुनिक यंत्र (एससीआर व एफजीडी) का शिलान्यास भी उन्होंने किया। उसी दौरान बतौर मुख्यमंत्री 5640 करोड़ रुपये के ट्रांसमिशन उपकेंद्र व लाइनों का भी लोकार्पण व शिलान्यास किया।



कहां-कहां फैलना शुरू हुआ प्रकाश
तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मलावन में दस हजार की लागत से बनने वाली 1320 मेगावॉट जवाहर तापीय परियोजना के साथ सोनभद्र जिले के ओबरा में प्रस्तावित 1320 मेगावॉट परियोजना का शिलान्यास कर गए। ऊर्जामंत्री का भी दायित्व संभाल रहे अखिलेश की प्राथमिकताओं में बिजली रही। लखनऊ में हुसैनाबाद के एक पॉवर सब स्टेशन का दिलचस्प किस्सा सुनिए, तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव से उनके एक स्थानीय एमएलसी ने कहा कि हमारे यहाँ का सब स्टेशन नहीं चल पाएगा क्योंकि यहाँ काम ही नहीं हो रहा है, तब उन्होंने अधिकारियों से बात की और उनको आश्वासन दिया कि तय समय पर ही यह शुरू होगा। लेकिन एमएलसी नहीं माने, अखिलेश यादव ने उनसे कहा कि अगर तय समय पर शुरू होगा तो आप इस्तीफ़ा दोगे। उन्होंने कहा दे दूँगा। तय समय पर वह सब स्टेशन शुरू हो गया। मगर उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया बल्कि सरकार को जाता देखकर पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में चले गए। मगर आज भी घण्टाघर की तरफ कोई जाए तो वह पॉवर सब स्टेशन देख सकता है कि कितनी जल्दी उसे खड़ा किया गया।

प्रयास रहा कि 2015 तक सबको मिलने लगेगी बिजली 
अखिलेश यादव ने उस समय यूपी को 220, 132 और 33/11 केवी का तोहफा दिया। उन्होंने 2000 करोड़ रुपये के 200 सब स्टेशन का उद्धघाटन किया। इसके साथ ही बिजली विभाग के नए स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर भवन का उद्घाटन किया। कानपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर घाटमपुर में नेवेली लिग्नाइट कापरेरेशन लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (यूपीआरवीयूएनएल) के संयुक्त तत्वाधान में 1980 मेगावाट के ताप विद्युत परियोजना (थर्मल पावर प्रोजेक्ट) का उद्घाटन किया। अखिलेश ने उस समय कहा भी कि यह खुशी की बात है कि केन्द्र की यूपीए सरकार का निवेली लिग्नाइट कारपोरेशन लिमिटेड आज प्रदेश में ताप विद्युत परियोजना का काम शुरू करने जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से पूछा था कि वह कितने दिनों में इसे पूरा कर देंगे इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि 36 माह में काम पूरा हो जायगा। उन्होंने उस वक़्त कहा कि इसका मतलब प्रदेश को वर्ष 2015 तक बिजली मिलने लगेगी। इस बिजली घर के लिये जिन जिन किसानों की जमीन ली गयी है उन्हें उचित मुआवजा तो दिया ही जाए साथ ही साथ उन्हें रोजगार भी दिलाया जाए।
 


कितनी खींची लकीर लंबी, धरातल पर अब क्‍या
अखिलेश यादव के कार्यकाल में ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ,विद्युत विभाग के कर्मचारी और अधिकारी इस सच को अच्छे से जानते हैं। 200 सब स्टेशन बनने से ही गांव गांव ज्यादा देर तक लाइट आने लायक माहौल बना। आज फीता काट देना बड़ा आसान है, किसी एक आध गांव में लाइट आ जाने पर अपनी पीठ थपथपाना बड़ा आसान है,मगर ऐसा इंफ्रा डेवलप करना, जिससे यह ख़्वाब पूरे हो सकें, बहुत मुश्किल काम है। हमने यहाँ उनके इसी क्षेत्र में केवल चुटकी भर कामों का ज़िक्र किया है।
अखिलेश यादव के बतौर मुख्यमंत्री तो हजारों काम हैं, बतौर ऊर्जा मंत्री जो उन्होंने लकीर खींची है। उसको पार करना हर एक के बस में नहीं है। उनकी शुरू की योजनाओं के फीते काटने में ही अगली सरकार का कार्यकाल पूरा होने को आया है। अगर यूपी के लोगों ने धर्म, जाति, वर्ग से उठकर वोट किया होता,तो उनके घरों में लगातार बिजली भी आती और इतना बढ़ा हुआ बिल भी नहीं आता।

ऐसे लोगों को चुनिए, जो आपके घरों को कर सकें रोशन 
यह वह सुविधाएं थीं, जो हमें मिल रही थीं,मगर हमे इनकी कद्र नहीं थी। अभी वक़्त है, चेत जाइये,धर्म,जाति, वर्ग से ऊपर उठकर ऐसे लोगों को चुनिए, जो आपके घरों को रौशन करना चाहते हैं। आपके बच्चों को चमकदार भविष्य देना चाहते हैं। यह सब हम इसलिए लिख रहे कि आप यह सच जान सकें कि अगर थोड़ी भी देर ज़्यादा आपके घर बल्ब जल सका है, तो उसमे किसका हाथ है और किसकी मेहनत है और आपसे किसका निश्छल प्रेम है। अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश से प्रेम किया था। इसकी हर चीज़ को सँवारा। पलट कर देखिये तो सही। सबसे बड़ी बात यह जानिए कि घर बनाना मुश्किल काम है या घर का फीता काटना। घर मे वायरिंग मुश्किल है या स्विच दबाकर बल्ब जलाना, जब यह समझ लीजिएगा,तो असली हुनरमंद हाथों की क़ाबलियत भी समझ लीजिएगा।


(लेखक लखनऊ में रहते हैं। स्‍वतंत्र लेखन करते हैं। आशिकी नामक एक किताब प्रकाशित)

नोट: यह लेखक के निजी विचार हैं। द फॉलोअप का सहमत होना जरूरी नहीं। हम असहमति के साहस और सहमति के विवेक का भी सम्मान करते हैं।