logo

आखिरकार कृषि बिलों को लेकर अकाली दल और भाजपा के 24 साल के पुराने रिश्ते पर लग गया ब्रेक

1492news.jpg
द फॉलोअप टीम, चंडीगढ़  
अंततः शिरोमणि अकाली दल ने एनडीए से नाता तोड़ लिया। कृषि बिलों को लेकर अकाली सांसद हरसिमरत कौर बादल ने बिल का विरोध करते हुए मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। बताया जा रहा है कि अकाली का मुख्य वोटर किसान है, जो कृषि बिलों को लेकर लगातार मोदी सरकार के खिलाफ पंजाब और हरियाणा में विरोध प्रदर्शन कर रहा है।

अकाली दल पर था दबाव
अकाली दल पर इसे लेकर काफी समय से दबाव था, जिसके बाद शनिवार को पार्टी की कार्यसमिति की आपातकालीन बैठक में एनडीए से अलग होने का फैसला लिया गया। अकाली दल और बीजेपी का 24 साल पुराना नाता है। साल 1996 के संसदीय चुनावों के ठीक बाद दोनों दलों में गठबंधन हुआ था। इसके बाद से ही दोनों ने पंजाब में कई दफे सरकार बनाई। पार्टी के नेता सुखबीर सिंह बादल ने बताया कि पार्टी वर्कर्स के अलावा किसानों से सहमति लेकर यह फैसला किया गया है।

मोदी ने अकाली दल की बात को अनसुना किया
मोदी सरकार द्वारा कृषि बिल लाए जाने के बाद से लगातार पंजाब और हरियाणा के किसान इसका विरोध कर रहे थे। ऐसे में पार्टी पर किसानों के इन विरोध-प्रदर्शन से लगातार दबाव बन रहा था। पार्टी के नेताओं के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में बिल्स के खिलाफ अकाली सांसद और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने विरोध जताया तो उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। बाद में लोकसभा से बिल के पारित होने के बाद कौर ने इस्तीफा दे दिया।

मोदी के बयान से नाराज थी हरसिमरत कौर
कौर के इस्तीफे के बाद बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिक्रिया देते हुए बिल विरोध करने वालों पर आरोप लगाया कि वे किसानों को भ्रमित कर रहे हैं। माना जा रहा था कि उनका यह निशाना अकाली दल पर भी था। सिमरत के इस्तीफे को नाटक बताते हुए विपक्षी दलों ने भी अकाली दल पर निशाना साधा था और उसके एनडीए में बने रहने पर सवाल उठाए थे। इन सब बातों के अलावा पंजाब और हरियाणा में बिल के खिलाफ किसानों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन से पार्टी पर लगातार दबाव बना हुआ था।

सुखबीर ने दिए थे संकेत
एनडीए से अलग होने के आधिकारिक ऐलान से कुछ देर पहले ही सुखबीर बादल ने यह बयान देकर अलगाव का संकेत दे दिया था कि उनकी पार्टी के लिए सिद्धांत किसी भी गठबंधन से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने दावा किया कि बिल को पारित करने से पहले न तो उनकी पार्टी को सूचना दी गई थी और न ही उनसे इस बारे में पूछा गया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने भी इस पर कहा कि अगर 3 करोड़ पंजाबियों की पीड़ा और उनका विरोध से भारत सरकार के कठोर रुख को नरम नहीं कर सकता तो यह बादल साहब और वाजपेयीजी द्वारा परिकल्पित एनडीए नहीं है।

टीडीपी-शिवसेना ने भी छोड़ा साथ
कौर ने कहा कि एक गठबंधन जो अपने सबसे पुराने सहयोगी के लिए बहरा और राष्ट्र का पेट भरने वाले किसानों के प्रति अंधा है, वह कभी पंजाब के हित में नहीं हो सकता। बता दें कि एनडीए से नाता तोड़ने वाला अकाली दल तीसरी बड़ी पार्टी है। इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद पिछले साल शिवसेना गठबंधन से अलग हो गई थी। वहीं साल 2018 में एनडीए की पुरानी सहयोगी टीडीपी ने भी बीजेपी से हाथ छुड़ा लिया था।