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धरती पर कितना समय बाकी है इंसानों का, आखिर...कब तक जिंदा रहेंगे हम! पढ़िये सारे सवाल का जवाब

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द फॉलोअप टीम, डेस्क:
हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के पूर्व छात्र सम्मेलन में में एवी लोएब (Avi Loeb) ने बताया कि सबसे ज्यादा जरूरी है इंसानों की उम्र को बढ़ाना क्योंकि हमारी तकनीकी सभ्यता कितने वर्षों तक जीवित रहेगी ये उनसे पूछा जा चुका है। ऐसे में उनका जवाब  है कि हम लोग अपने जीवन के बीच हिस्से में है। तकनीकी सभ्यता की शुरुआत सैकड़ों साल पहले हुई थी जो उस समय बच्चा था अभी तकनीक किशोरावस्था में हैं। यह लाखों साल तक बची रह सकती है।



तकनीक कुछ समय तक ही जीवित रह सकता है
उन्होंने कहा कि यह कुछ सदियों तक जीवित रह सकता है लेकिन इससे ज्यादा नहीं। एवी लोएब ने यह एक गणितीय गणना के आधार पर बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से धरती खराब हो रही है। उससे लगता है कि इंसान ज्यादा दिन धरती पर रह नहीं सकेंगे। कुछ सदियों में ही धरती की हालत इतनी खराब हो जाएगी कि लोगों को स्पेस में जाकर रहना पड़ सकता है। सबसे बड़ा खतरा तकनीकी आपदा का है। जो की जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़ी रहेगी। इसके अलावा इंसानों द्वारा विकसित महामारी और देशों के बीच युद्ध। अगर इन सबको लेकर सकारात्मक नहीं हुए इंसान तो धरती खुद इंसान को खत्म कर देगी या फिर वह खुद ही खत्म हो जाएगी। 

इंसानी गतिविधियां और अत्याचार कर देंगे विनाश
इंसानी गतिविधियों के कारण धरती पर इतना अत्याचार हो कि वह खुद ही नष्ट होने लगे। इंसान उन खतरों से खुद को नहीं बचा पाते जिससे वो पहले कभी न टकराए हों। जैसे जलवायु परिवर्तन। जैसे अलग-अलग देशों में मौसम परिवर्तन होना, ग्लेशियर पिघलना, समुद्री जलस्तर बढ़ रहा है। ज्वालामुखी फिर से आग उगलने लगे हैं। जंगल में आग लग रहे है। ये विनाश की निशानी है। 

प्रकृति से छेड़छाड़ का किसी को अधिकार नहीं है
फिजिक्स का मॉडल कहता है कि हम सब एलिमेंट्री पार्टिकल्स से बने हैं। जिसमें अलग से कुछ नहीं जोड़ा गया है और ना जा सकता है। इसलिए प्रकृति के नियमों के आधार पर इनसे छेड़छाड़ करने का हमें कोई अधिकार नहीं है क्योंकि सभी मूल तत्व फिजिक्स के नियमों के तहत आपस में एक दूसरे से परस्पर जुड़े है। अगर इनसे छेड़छाड़ की आजादी मिलती है तो इससे सिर्फ नुकसान ही होगा।



इंसानी सभ्यता कब तक रहेगी ये इसपे निर्भर है
एवी ने कहा कि इंसान की सभ्यता कब तक रहेगी ये भविष्य में होने वाले तकनीकी विकास पर निर्भर करता है। लेकिन तब तक इंसान खुद ही अपना शिकार कर डालेंगे क्योंकि सूरज से पहले भी कई ग्रह बने हैं। हो सकता है कि कई ग्रह ऐसे हो जहां पर जीव रहते हों। उनके पास भी तकनीकी सभ्यता हो। या हो सकता है वो तकनीकी सभ्यता को अपनी पारंपरिक और प्राचीन सभ्यता के साथ मिलाकर चल रहे हों ताकि तकनीकी सभ्यता के कारण उनकी पहचान न खो जाए। जब रेडियोएक्टिव एटम धीरे-धीरे खत्म हो सकता है तो अन्य जीवन देने वाले एटम क्यों नहीं खत्म हो सकते। इंसान को अंतरिक्ष की प्राचीनता की स्टडी करनी चाहिए। उन्हें मृत तकनीकी सभ्यताओं की खोज कर उसमे स्टडी करनी चाहिए। पता करना चाहिए कि ये सभ्यताएं कैसे खत्म हो गयी। 

इंसान हमेशा अपने जीने का तरीका निकाल लेता है
ऐसी ही हालत इंसानों के साथ न हो लेकिन इंसान हमेशा से अपने जीने का रास्ता निकाल लेता है। इसलिए हो सकता है कि भविष्य में इंसान अंतरिक्ष में जाकर भी खुद को बचाने में सफल हो लेकिन वहां भी कठिनाइयां कम नहीं है क्योंकि स्पेस स्टेशन बनाएंगे तो वहां भी किसी ने किसी ग्रह के आसपास ही जिसकी कोई गुरुत्वाकर्षण शक्ति हो क्योंकि बिना ग्रैविटी वाले ग्रह के स्पेस स्टेशन का कोई मतलब नहीं रहता। धरती खत्म होगी तो उसकी ग्रैविटी भी खत्म हो जाएगी, ऐसे में इंसान इसकी ग्रैविटी का उपयोग करके अंतरिक्ष में लटके नहीं रह पाएंगे।

क्या मंगल ग्रह पर सभी इंसानों का जाना संभव है
उन्होंने कहा मान लीजिए इंसान मंगल ग्रह पर जाने की बात करता है और हो सकता है अगले 6-7 दशकों में पहुंच कर वहां घर भी बना ले लेकिन कितने लोग मंगल पर जा पाएंगे। क्या इतना पैसा वो खर्च कर पाएंगे अगर कर भी लिया तो मंगल तक जाने के दौरान कॉस्मिक किरणों, ऊर्जावान सौर कणों, अल्ट्रावायलेट किरणों, सांस लेने लायक वायुमंडल की कमी और कम गुरुत्वाकर्षण इंसानों को ज्यादा दिन जीने देगी। इन दिक्कतों का सामना करके कुछ इंसान मंगल पर रहने भी लगे तो उन्हें फिर से अपनी दुनिया बनाने और धरती से और लोगों को ले जाने में कई दशक लग जाएंगे। 

मंगल ग्रह पर जाकर क्या किसी और ग्रह की खोज होगी
मंगल पर जाकर रहने से एक बड़ा फायदा ये होगा कि हम वहां से अन्य रहने योग्य ग्रहों की खोज कर पाएंगे। कुछ लोगों ने सवाल भी पूछे कि अंतरिक्ष मिशन पर करोड़ों रुपयों का खर्च क्यों किया जाए? उन पैसों का उपयोग धरती पर रह रहे लोगों की भलाई में किया जाए। इस प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि अपने छोटे से कैंपस में रहकर खत्म होने से बेहतर है कि आप दुनिया के अलग-अलग इलाकों की खोज करें। धरती पर भी और अंतरिक्ष में भी ऐसे सवाल हर तकनीकी विकास से पहले किए जाते हैं। सड़कों से घोड़ों की संख्या तब कम हुई जब कारें बनीं। सेलफोन आया तो उससे पहले सवाल उठाया गया कि इतना बड़ा ग्रिड नेटवर्क कैसे बनेगा लेकिन ये सब कुछ हुआ। चांद पर इंसान पहुंचा लेकिन उससे पहले सवाल उठा था ये संभव नहीं है। कैसे करेंगे? लेकिन सब हुआ इंसान चाहे तो खुद को धरती को बचाने के तरीके निकाल सकता है। 

इंसानों को धरती पर उपजी स्थानीय समस्या खत्म करनी होगी
एवी लोएब ने कहा हमारी पहली जरूरत है स्थानीय समस्याओं को खत्म करना लेकिन साथ ही हमें नए चीजें भी खोजनी है। नई तकनीक विकसित करनी होगी। जो इंसान को को बचा सके। इससे कुछ सदी जीने के लिए और मिल जाएगी नहीं तो समय से पहले इंसान और धरती दोनों खत्म हो जाएंगे  हमें वैश्विक समस्याओं को भी निपटाना होगा  अगर हम नहीं बचा पाएंगे तो दूसरे ग्रह पर जाने की व्यवस्था कर लें क्योंकि जिस हिसाब से इंसान अपने काम कर रहा है, उससे अनुसार धरती बदला लेगी।