सूरज ठाकुर, रांची:
देश के किसी भी नागरिक का मूलभूत अधिकार है शिक्षा। अच्छी शिक्षा होगी तभी बेहतर मानव संसाधन तैयार होंगे। देश के लिए उपयोगी योगदान दे सकेंगे। हैरानी होती है कि ना तो केंद्र सरकार और ना ही राज्य इस बारे में गंभीर दिखती है। ज्यादा हैरानी की बात ये है कि किसी भी राजनीतिक दल के किसी भी चुनावी घोषणापत्र में कोई ठोस रणनीति नहीं दिखती। सरकारें शिक्षा को लेकर केवल मौखिक दावों तक ही सीमित रहती हैं। ये हम नहीं कह रहे बल्कि आंकड़ा कहता है।
मृतप्राय हो चुकी है झारखंड की शिक्षा व्यवस्था
झारखंड में शिक्षा की स्थिति बदहाल है। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति मृतप्राय हो चुकी है। बेहतर शिक्षा के नाम पर केवल बिल्डिंग्स बनाई गई हैं जिनमें भ्रष्टाचार के असंख्य दाग हैं। सवाल वही है कि जब शिक्षक ही नहीं होंगे तो शिक्षा कहां से मिलेगी। झारखंड के कई जिलो में वैसे स्कूल हैं जहां केवल 1 ही शिक्षक हैं। कई विद्यालय वैसे हैं जहां 300 या 400 बच्चों पर दो या तीन शिक्षक ही हैं। उन शिक्षकों को भी पोलियो ड्रॉप पिलाने से लेकर जनगणना तक की जिम्मेदारी दी जाती है। आप भी अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि ऐसी स्थिति में क्या शिक्षा दी जायेगी। कई सवालों का जवाब तो इस बात पर ही मिल जायेगा कि राज्य में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति क्या है।
झारखंड में प्रारंभिक विद्यालयों में हजारों पद रिक्त
झारखंड में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की कुल संख्या 35 हजार 447 हैं। इन स्कूलों में 41 हजार 501 शिक्षक कार्यरत हैं। कोर्ट के आदेश पर पुरानी नियुक्तियां साल 2019 में की गई थी। उसके बाद अब तक किसी भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई। 18 मार्च 2021 को भारतीय जनता पार्टी के विधायक भानु प्रताप शाही ने विधानसभा में शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित सवाल पूछा था। इसके जवाब में पेयजल एंव स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा था कि राज्य में 39 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद रिक्त हैंं। इनमें पहली से लेकर आठवीं तक की कक्षा के लिए यानी प्राथमिक शिक्षकों का 33 हजार 853 पद रिक्त है। उच्च विद्यालयों में 5 हजार 934 पद रिक्त हैं। सरकार ने ये भी बताया कि 1336 अपग्रेडेड विद्यालयों में प्रधानाध्यापक ही नहीं हैं। कुल मिलाकर 95 फीसदी मध्य विद्यालय प्रधानाध्यापक विहीन हैं। झारखंड में प्रारंभिक विद्यालयों में अंतिम बार शिक्षकों की नियुक्ति साल 2015 में की गई थी।
शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर हेमंत सरकार उदासीन
एक आरटीआई के जवाब में मिली जानकारी के मुताबिक साल 2018 में झारखंड में स्कूलों का विलय या रेशनलाइजेशन किया गया। इस प्रक्रिया में राज्य में 4500 शिक्षकों का पद समाप्त हो गया। उस समय मिली जानकारी के मुताबिक तब प्राइमरी स्कूल में 17 हजार 835 शिक्षकों का पद रिक्त था। माध्यमिक विद्यालयों में 13 हजार 616 शिक्षकों का पद रिक्त था वहीं प्लस टू स्कूल में 3 हजार 64 पद रिक्त था। इस स्टोरी को फिलहाल प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति तक सीमित रखते हैं।
2016 जेटेट पास अभ्यर्थियों की अभी तक नियुक्ति नहीं
राज्य में प्रारंभिक शिक्षकों की बहाली के मामले को ठीक से समझने के लिए हमने जेटेट उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा के उपाध्यक्ष मुरारी कुमार दास से बातचीत की। उन्होंने बताया कि झारखंड निर्माण के पश्चात झारखंड प्रारंभिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली 2012 के तहत मात्र दो बार जेटेट परीक्षा आयोजित की गई। पहला 2013 में तथा दूसरा 2016 में। 2013 जेटेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की बहाली प्रक्रिया तीन बार, 2014, 2015 और 2019 में आयोजित की गई। 2014, 2015 और 2019 में अधिकतम 13 काउंसिंलिंग के माध्यम से की गई। वहीं 2016 में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार भी नहीं की गई है। 2016 में दूसरी बार जेटेट की परीक्षा ली गई। इसमें तकरीबन साढ़े 3 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया जिसमें से 52 हजार अभ्यर्थियों ने क्वालीफाई किया।
बीते साढ़े 4 साल से झारखंड में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं
जेटेट उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष परिमल कहते हैं 2016 में जेटेट का परिणाम आये साढ़े 4 साल बीत चुके हैं। इसमें से 3 साल बीजेपी की सत्ता थी और बाकी डेढ़ साल हेमंत सोरेन की। अभी तक नियुक्ति की प्रक्रिया नहीं निकाली गई। चिंताजनक बात ये है कि 2016 वाले जेटेट सर्टिफिकेट की वैलिडिटी पांच साल की ही थी। इसकी समय सीमा समाप्त होने में अब महज कुछ महीनों का वक्त बचा है। परिमल कहते हैं कि हमें बिलकुल नहीं समझ आ रहा है कि सरकार की क्या नीति है। जब सदन में इस बाबत सवाल पूछा गया था तो पेयजल एंवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि नई शिक्षक नियुक्ति नियमावली बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नई नियमावली के आधार पर ही राज्य में शिक्षकों की बहाली की जायेगी। जेटेट सर्टिफिकेट की वैलिडिटी संबंधी सवाल पर हेमंत सरकार कहती है कि इसे आजीवन किया जायेगा। परंतु, परिमल कहते हैं कि इसका क्या फायदा होगा।
जेटेट-सीटेट सर्टिफिकेट वैलिडिटी पर हो रहा छलावा
परिमल कहते हैं कि क्या जेटेट सर्टिफिकेट की आजीवन वैलिडिटी से उम्र सीमा में छूट मिल जायेगी। क्या जिन अभ्यर्थियों को 30 साल की उम्र में शिक्षक बन जाना चाहिए था उन्हें सरकार 40 की उम्र में भी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में आवेदन करने देगी। परिमल कहते हैं कि केंद्र सरकार ने तो सीटैट क्वालीफाइ करने वाले अभ्यर्थियों को आजीवन सर्टिफिकेट वैलिडिटी का नियम बना दिया है लेकिन इसका फायदा क्या होगा। वहीं झारखंड सरकार ने तो आवीजन वैलिडिटी का केवल वादा ही किया है। आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा।
क्या कहता है शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2011
गौरतलब है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2011 के तहत प्रत्येक तीस बच्चों पर 1 शिक्षक होना चाहिए लेकिन हालात ये हैं कि पूरा का पूरा स्कूल ही 1 शिक्षक के भरोसे चल रहा है। एक ही विषय के शिक्षक को बाकी विषय भी पढ़ाना पड़ता है। 400 तक की बच्चों की संख्या पर महज 2 या तीन शिक्षक हैं। क्यों ना इसे शिक्षा का अधिकार कानून का उल्लंघन कहा जाये।
परिमल बताते हैं कि लोकसभा में प्राथमिक शिक्षक को लेकर उठे मुद्दे पर जवाब आया था कि कुल 94 हजार शिक्षकों की कमी है जिसमें से प्राथमिक शिक्षक में 71 हजार शिक्षकों की कमी है। जाहिर है कि जब शिक्षक ही नहीं होंगे तो शिक्षा का क्या हश्र होगा। यही वजह है कि असर नाम की संस्था द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि झारखंड और बिहार के स्कूलों में पांचवी कक्षा तक के बच्चों को सामान्य हिंदी, अंग्रेजी और गणित पढ़ने में मुश्किल आती है। बच्चे मुश्किल में हैं।
नई नियमावली के आधार पर नियुक्ति की जायेगी
सरकार कह रही है कि नई नियमावली के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी। टेट सर्टिफिकेट वैलिडिटी खत्म होने में कुछ ही महीनों का वक्त रह गया है। जेटेट उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा के अध्यक्ष परिमल कहते हैं कि जब जेटेट की परीक्षा झारखंड प्रारंभिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली 2012 के आधार पर आय़ोजित की गई थी तो फिर नई शिक्षक नियमावली की जरूरत क्या है। यदि नई नियमावली में सीमा संबंधी कोई बदलाव हो गया तो कई अभ्यर्थियों का पूरा प्रयास और सारी उम्मीद व्यर्थ हो जायेगी। सरकार के पास इसका क्या जवाब है।
बता दें कि प्राथमिक शिक्षक पद पर नियुक्ति प्रक्रिया आयोजित करने की मांग को लेकर कई बार प्रदर्शन हो चुका है। अभ्यर्थी राजभवन, मुख्यमंत्री आवास और विधानसभा का घेराव कर चुके हैं। लाठियां खाई हैं। मोरहाबादी में धरना प्रदर्शन हो चुका है लेकिन सरकार नहीं सुनती।
शिक्षकों की कमी है तो फिर कैसे दी जायेगी शिक्षा
जेटेट उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा के कार्यकारिणी अध्यक्ष अफरोज आलम कहते हैं कि राज्य में शिक्षकों की घोर कमी है। युवा जेटेट पास अभ्यर्थी नियुक्ति की बाट जोह रहे हैं। सरकार शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने का वादा करती जा रही है लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति से पल्ला झाड़ लेती है। वर्तमान में कोरोना महामारी की वजह से क्लासेज ऑनलाइन चल रही है। पहले से ही शिक्षकों की कमी का सामना कर रही प्राथमिक शिक्षा और रसातल में चली गई क्योंकि सरकार के पास उपयुक्त संसाधनों का अभाव है।
जो भी पुराने शिक्षक हैं वो तकनीक में उतने पारंगत नहीं हैं जितने ये युवा जेटेट अभ्यर्थी होते। ऑनलाइन क्लास के नाम पर फिलहाल केवल खानापूर्ति की जा रही है। जो शिक्षक कार्यरत हैं उनको कोरोना ड्यूटी में लगाया जा चुका है। एक तो क्लास नहीं हो रही। ऑनलाइन क्लास में हजार दिक्कते हैं। तिस पर शिक्षकों की कमी ने कोढ़ में खाज का काम किया है। शिक्षा व्यवस्था कैसे ठीक होगी।
सरकार से जल्दी नियुक्ति प्रक्रिया जारी करने की मांग
जेटेट उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा के मिर्जा कच्छप कहते हैं कि हमारी यही मांग है कि सरकार जल्द से जल्द प्राथमिक शिक्षकों की बहाली करे। कितने ही अभ्यर्थी केवल इसी आस में बीते साढ़े 4 साल से बैठे हैं। उनकी सारी उम्मीद इसी से जुड़ी है। ना केवल अभ्यर्थियों की उम्मीद बल्कि झारखंड की प्राथमिक शिक्षा की उम्मीद भी यही शिक्षक होंगे। सरकार को जल्दी से जल्दी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। जेटेट क्वालीफाइ सर्टिफिकेट की वैलिडिटी के संबंध में भी सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा। और देरी ज्यादा संकट खड़ा करेगी। बाकी अभ्यर्थियों का भी कहना है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। धरातल पर परिणाम दिखाना होगा।