द फॉलोअप टीम, दिल्ली:
यह बातें हमेशा सामने आती रहती हैं कि जेलों में दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग और अल्पपसंख्यक समुदाय के कैदियों की संख्या सबसे अधिक है। इनमें अधिकतर वे लोग हैं, जिनके केस पर फैसला भी नहीं सुनाया गया है। सरकार के ताजा आंकड़े ही बताते हैं कि जेलों में एससी, एसटी, ओबीसी कैटेगरी से 3.15 लाख यानी 65.90% कैदी हैं।
ऐसे कैदियों की संख्या 3.15 लाख
राजसभा के सदस्य सैयद नासिर हुसैन ने सदन में यह सवाल पूछा था कि देश की जिलों में कितने कैदी दलित और मुस्लिम हैं? उनकी संख्या कितनी है, और सरकार उनके पुनर्वास और शिक्षा के लिए सरकार क्या कर रही है? गृह मामलों के मंत्री किशन रेड्डी ने सदन को बताया कि 2019 तक की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार देश के 4,78,600 जेल कैदियों में से 3,15,409 या 65.90 प्रतिशत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) केटेगरी से थे।
राज्यसभा में मंत्री किशन रेड्डी ने बताया
राज्यरसभा में मंत्री किशन रेड्डी ने बताया कि जेल में 1,26,393 कैदी अन्य समूह के हैं। इन आंकड़ों से मालूम चलता है कि 1,62,800 कैदी (34.01 प्रतिशत) ओबीसी श्रेणी के , 99,273 (20.74 प्रतिशत) एससी वर्ग और 53,336 (11.14 प्रतिशत) एसटी वर्ग के थे। जिसमें 4,58,687 (95.83 प्रतिशत) पुरुष और 19,913 (4.16 प्रतिशत) महिलाएं शामिल हैं।
4.16 प्रतिशत महिला कैदियों की तादाद
महिला कैदी की श्रेणियों को देखा जाये तो 19,913 महिला कैदी में से 6,360 (31.93 प्रतिशत) ओबीसी श्रेणी की थीं, जबकि 4,467 (22.43 प्रतिशत) अनुसूचित जाति, 2,281 (11.45 प्रतिशत) एसटी और 5,236 (26.29 प्रतिशत) 'अन्य' श्रेणी में थीं। देश के राज्यों में झारखण्ड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार में कैदियों की पूरी संख्या सामने आई हैं।
उत्तर प्रदेश की जेलों में सबसे अधिक बंद
आंकड़ों के अनुसार, ओबीसी, एससी और 'अन्य' श्रेणियों के कैदियों की अधिक संख्या उत्तर प्रदेश की जेलों में थी, जबकि मध्य प्रदेश की जेलों में एसटी समुदाय के कैदियों की संख्या ज्यादा थी। पश्चिम बंगाल द्वारा 2018 और 2019 के आंकड़ों को प्रस्तुत नहीं किया, जिसके कारण 2017 के उसके आंकड़ों में डेटा का उपयोग किया गया था।
कैदियों को शिक्षित करने का हो रहा प्रयास
कैदियों को शिक्षित और उनको पुनर्वास करने में केंद्र के प्रयासों पर जवाब मांगने पर, रेड्डी ने कहा कि जेलों और हिरासत में लिए गए लोगों को शिक्षित करने और उनके पुनर्वास पर विचार करने का नियम राज्य सरकारों को है। हालांकि, राज्यों को इस सन्दर्भ में मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स द्वारा मई 2016 में एक मॉडल जेल मैनुअल प्रसारित किया था। इस जेल मैनुअल में कैदियों के पुनर्वास और शिक्षा जैसे 'कैदियों की शिक्षा' उनके 'व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास', 'कैदियों के कल्याण', और उनके देखभाल का भी उल्लेख किया गया था।