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अब पूछने लगे हैं झारखंड के युवा, डिअर चीफ मिनिस्टर, व्हेअर आर द जॉब्स ब्रो!

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सूरज ठाकुर, रांची: 

रोजगार। भारतीय समाज के एक मध्यमवर्गीय परिवार में किसी भी माता-पिता या छात्र का सपना होता है एक अदद सरकारी नौकरी का। पूरे जीवन का कुल हासिल ही लोग सरकारी नौकरी को समझते हैं। आपको झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 की कुछ धुंधली सी भी याद है क्या। चुनावी रैलियों में अब की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रत्येक वर्ष पांच लाख रोजगार देने की बात की थी। खैर, राजनीतिक परंपरा का निर्वहन करते हुए वो मुकर गये। 


अच्छा ये तो याद होगा। नई नियोजन नीति लाने की बात कही गई। ये भी कहा गया कि साल 2021 नियुक्तियों का वर्ष होगा। जून का महीना आ गया। अब तक कोई रोजगार नहीं मिला। अब तो युवा पूछने लगे हैं। डिअर चीफ मिनिस्टर! व्हेअर आर द जॉब्स ब्रो...।


30 जून को पेयजल विभाग में 1118 कर्मियों की सेवा खत्म
रोजगार मिला या कब मिलेगा। इसकी बात करेंगे लेकिन पहले ये जान लीजिए। 30 जून को पेयजल विभाग में कार्यरत 1118 कर्मियों की सेवा समाप्त हो जाएगी। मतलब कि ये लोग बेरोजगार हो जाएंगे। ये सभी लोग संविदा पर नियुक्त किए गए थे। भारत सरकार की नई योजना आई। स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 और जल मिशन की। केंद्र ने नई योजना में नए सिरे से प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के गठन के निर्देश दिया। इसमें जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक केवल 332 पद ही सृजित हैं। सीधा सा मतलब है कि बाकी लोगों का रोजगार जाएगा। वे करेंगे क्या। ये तो हो गई पेजयल और स्वच्छता विभाग की बात। यहां भी संविदा-संविदा का ही खेल चल रहा है। 



आयुष चिकित्सकों की सरकार से समायोजित करने की मांग
प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संविदा पर कार्यरत आयुष चिकित्सक बीते कई महीनों से आयुष एसोसिएशन ऑफ झारखंड के बैनर तले समायोजन की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि वे बीते कई वर्षों से राज्य के अलग-अलग सीएचसी और पीएचसी में अपनी सेवा देते आए हैं। मेडिकल ऑफिसर, आरबीएसके, लेप्रोसी कंसलटेंट सहित कई पदों पर वे कार्यरत हैं। पूरे कोरोना काल में उन्होंने अपनी जिंदगी जोखिम में डाली। कई बार बिना वेतन महीनों तक काम किया। उनको कार्य का अच्छा-खासा अनुभव भी हो चुका है। उनको संविदा की बजाय समायोजन किया जाना चाहिए। 

स्वास्थ्य विभाग में कई पदों पर संविदाकर्मियों की होगी नियुक्ति
इस बीच गुरुवार को हजारीबाग से नई खबर आई। हजारीबाग जिला स्वास्थ्य विभाग में कई पदों पर नियुक्तियां की जानी है। एएनएम, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और ब्लॉक डाटा ऑपरेटर जैसे कई पदों पर नियुक्ति की जानी है। इनको 1 वर्ष की संविदा पर नियुक्त किया जायेगा। अधिसूचना में साफ-साफ लिखा है कि कर्मियों को कभी भी बिना कोई कारण बताए एक माह की अग्रिम नोटिस या फिर एक माह का मानदेय देकर टाटा-बाय-बाय कहा जा सकता है। इसमें ये भी लिखा है कि कर्मी कभी भी भविष्य में स्थायीकरण या समायोजन की मांग नहीं कर सकेंगे। शर्तें मंजूर है तो आवेदन कीजिए। एक खबर और है। स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक कार्यरत 1100 कर्मियों की सेवा भी समाप्त होने वाली है क्योंकि वे संविदा पर कार्यरत हैं। 

जनवरी 2021 में मुख्यमंत्री ने की थी नियुक्ति वर्ष की घोषणा
अब थोड़ा टाइम ट्रेवल करते हैं। अतीत में चलते हैं। ज्यादा नहीं बस छह महीने पीछे। जनवरी 2021 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की थी कि 1 लाख 60 हजार सृजित पदों पर बहाली की जाएगी। कहा गया कि शिक्षा विभाग में सर्वाधिक 25 हजार शिक्षकों की बहाली की जाएगी। यही नहीं, पुलिस विभाग, सचिवालय सेवा संवर्ग और स्वास्थ्य विभाग में भी हजारों नई भर्तियों का एलान किया गया। 

आपने वो वाला गाना तो सुना होगा। लक्ष्य फिल्म का। ऋतिक रोशन को प्रीति जिंटा कहती है कि इसी बात को थोड़ा...और सजा के कहते। थोड़ा घुमा-फिरा के कहते तो अच्छा होता। सरकार भी फिल्म देखती ही होगी। नई नियुक्तियों का एलान किया तो सजा कर कहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि नया वर्ष नियुक्तियों का वर्ष होगा। नियुक्ति वर्ष होगा। लेकिन नियुक्तियां कहां हैं। 

नई नियोजन नीति के नाम पर रद्द हुई पिछली नियुक्ति प्रक्रिया
हुआ क्या। नई नियोजन नीति की बात कहकर पिछली सरकार में निकाली गई सभी भर्ती प्रक्रिया अथवा नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया। जेपीएससी की तीन वर्ष की नियुक्ति एक साथ ही निकाल दी गई। फीस तय किया गया 600 रुपया। हाय-तौबा मची तो 100 रुपये किया गया। इसकी प्रारंभिक परीक्षा 2 मई को होनी थी लेकिन कोरोना की वजह से टाल दी गयी। इस बीच एक सप्ताह पहले छठी जेपीएससी परीक्षा का परिणाम रद्द कर दिया गया। झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि क्वालीफाइंग मार्क्स को मुख्य अंक के साथ जोड़कर परिणाम जारी किया गया। आरक्षण प्रक्रिया में भी धांधली की गई। सुधार कीजिए और 8 हफ्तों बाद दोबारा परिणाम जारी कीजिए। 

जुलाई में सदस्य विहीन हो जायेगा झारखंड लोक सेवा आयोग!
इस बीच ये भी खबर आई कि जुलाई महीने में झारखंड लोक सेवा आयोग सदस्य विहीन हो जायेगा क्योंकि इसके आखिरी सदस्य का भी कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। अब बात करते हैं जेपीएससी की नई परीक्षा के बारे में। ये कब होगा ये तो नहीं कहा जा सकता। पेंच इसमें भी भयानक है। उम्र सीमा, स्थानीयता और आरक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो चुका है। क्या ही कहा जाये। 



झारखंड के विभिन्न सरकारी विभागों में कितने पद रिक्त हैं
अब ये भी जान लेते हैं कि झारखंड में विभिन्न सरकारी विभागों में कितने सृजित पद हैं और कितने खाली हैं। झारखंड में विभिन्न विभागों में 5 लाख 25 हजार 115 पद सृजित हैं। महज 1 लाख 95 हजार 255 पदों पर लोग काम कर रहे हैं। बाकी 3 लाख 29 हजार 860 पद रिक्त हैं। राज्य के गृह , कारा और आपदा प्रबंधन विभाग में 1 लाख 51 हजार 407 पदों में से 73 हजार 938 पद रिक्त हैं। स्कूली शिक्षा विभाग में 1 लाख 50 हजार 577 सृजित पदों में से 1 लाख 4 हजार 96 पद रिक्त हैं। कृषि विभाग में 35 हजार पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य विभाग में 45 हजार 525 सृजित पद में से 35 हजार 322 पद रिक्त हैं। विधि विभाग में 8 हजार 905 सृजित पद में से 4 हजार 36 पद रिक्त हैं। पेजयल एवं स्वच्छता विभाग में 5 हजार 516 सृजित पद में से 3 हजार 464 पद रिक्त हैं।

इन विभागो में भी रिक्त हैं हजारों सृजित पद, जानिए कितनी
पथ निर्माण विभाग में 3 हजार 793 सृजित पद में से 1 हजार 729 पद रिक्त हैं। ग्रामीण विकास विभाग में 10 हजार 374 में से 7 हजार 341 पद रिक्त हैं। जल संसाधन विभाग में 10 हजार 803 सृजित पद में से 5 हजार 119 पद रिक्त हैं। पंचायती राज विभाग में 9 हजार 729 सृजित पद में से 6 हजार 696 पद रिक्त हैं। महिला एंव बाल विकास विभाग में 5 हजार 21 सृजित पद में से 2 हजार 762 पद रिक्त हैं। एनआरईपी में 4 हजार 407 में से 2 हजार 765 पद रिक्त हैं। हाईकोर्ट प्रशासन में 1 हजार 541 सृजित पद में से केवल 923 कार्यबल तैनात है। ये तो केवल मुख्य विभागों का आंकड़ा हमने यहां पेश किया है। ऐसे दर्जन भर और विभाग हैं जिनमें हजारों सृजित पद रिक्त हैं। 



संविदा आधारित नियुक्तियों पर कब तक चलेगा झारखंड राज्य
झारखंड में साल 2016 में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी। ये पांचवा साल है। उस प्रक्रिया का क्या हुआ कोई नहीं जानता। पंचायत सचिव के पद पर नियुक्ति के लिए परीक्षा ली गई थी। बीते कई महीनों से अभ्यर्थी सरकार और राज्य कर्मचारी चयन आयोग के बीच चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं देता की आखिर नियुक्तियां कब की जायेंगी। संविदा पर छिटपुट नियुक्तियों द्वारा काम चलाने और खुश करने का काम सरकार द्वारा किया जा रहा है। संविदा पर नियुक्तियों में ना तो रोजगार की गारंटी है और ना वेतन की। भविष्य का तो छोड़ ही दीजिए। शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक में संविदा पर नियुक्तियां की जा रही हैं। मुख्यमंत्री जी! आपने कहा था कि 2021 नियुक्तियों का वर्ष होगा। ये कब कहा था कि संविदा का वर्ष होगा।