द फॉलोअप टीम, रांची:
जनजातीय बहुल इलाकों में किशोरों में संकोच क्यों होता है। जनजातीय बहुल इलाके में किशोरों पर संकोच को लेकर स्टडी की जाएगी। स्टडी के लिए एक टीम गठित की गई है। झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के समसामयिक और जनजातीय विधि विभाग के समन्वयक डॉ. शमशेर आलम की रिसर्च टीम का चयन इस प्रोजेक्ट के लिए किया गया है। डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान ने इस टीम का चयन स्टडी प्रोजेक्ट के लिए किया है।
इनसे मिलकर बनी है रिसर्च टीम
जानकारी के मुताबिक 4 सदस्यीय इस टीम में बतौर को-प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंस कोलकाता के डॉ. विभूति नायक, स्वतंत्र शोधकर्ता डॉ. कृष्णा गोप औऱ तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की डॉ. कृति गुप्ता शामिल हैं।
इन जिलों में किया जाएगा शोधकार्य
जानकारी के मुताबिक इस स्टडी में 4 जनजातीय बहुल और 3 गैर जनजातीय जिलों को शामिल किया जाएगा। जनजातीय बहुल जिलों में रांची, सिमडेगा, खूंटी और दुमका तथा गैर जनजातीय जिलों में हजारीबाग, कोडरमा, चतरा जिले में 14 से 23 वर्ष के आयुवर्ग के स्कूल और कॉलेज जाने वाले आदिवासी किशोरों को स्टडी में शामिल किया जाएगा। इस स्टडी में इन किशोरों में कम्युनिकेशन और एक्स्ट्रा कैरिकुलर एक्टिविटी में संकोच का अध्ययन किया जाएगा।
रिसर्च असिस्टेंट की भी बहाली होगी
डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय शोश संस्थान ने इस शोधकार्य के लिए 5 लाख 57 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। स्टडी का कार्य नौ महीने के अंदर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। शोधकार्य के प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर डॉ. आलम ने बताया कि शोधकार्य ठीक ढंग से चले, इसके लिए 2 रिसर्च असिस्टेंट की बहाली के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। विज्ञापन झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
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रिसर्च असिस्टेंट के पद पर आवेदन के लिए अंतिम तिथि 28 फरवरी है। नियुक्ति प्रक्रिया पांच मार्च को शुरू होगी। चयनित रिसर्च असिस्टेंट को सात महीने के लिए संविदा पर रखा जाएगा। इन रिसर्च असिस्टेंट्स को प्रतिमाह 20 हजार रुपये का मानदेय भी दिया जाएगा। इन्हें शोधकार्य के लिए अलग से यात्रा भत्ता भी दिया जाएगा।