द फॉलोअप टीम, डेस्क :
तेजी से एडवांस होती दुनिया ने यूं तो कई उपलब्धियां हासिल की हैं, कई ऐसे कारनमे कर के दिखाए जो शायद नामुमकिन से लगते थे। मानव विकास के लिए यह सारी उपलब्धियां तारीफ के क़ाबिल हैंं। मगर यह बात भी हम नजरअंदाज नहीं कर सकते कि अपने टेक्नोलॉजी को एडवांस बनाने की इस होड़ में सेल्युलर कंपनियाँ(cellular companies) ख़तरनाक सेल टावर लगा रही हैं, जिसे 5,000 से ज़्यादा वैज्ञानिक शोध ने साबित किया है कि यह सेल टावर से लोग मौत का शिकार हो रहे हैं। आज कल देश और दुनिय में 5G को लेकर जंग चिढ़ी है। एक ओर जहाँ नेटवर्क प्रोवाइडर्स(network providers) इस प्लान को जल्द से जल्द काम में लेन की तैयारी कर रहे है तो वहीँ हज़ारों वैज्ञानिक का कहना है कि यदि यह प्लान कामयाब हो गया तो कोई भी व्यक्ति, जानवर, या पेड़-पौधा भी रेडियो फ़्रीक्वेंसी रेडिएशन(radio frequency radiation) से हर क्षण पेश आने वाले रेडिएशन(Radiation) से बच नहीं पाएगा और इस रेडिएशन का स्तर आज के स्तर 10 से 100 गुना ज़्यादा होगा।
क्या है 5G
5G यानी पांचवीं पीढ़ी(fifth generation) का मोबाइल नेटवर्क। आप और हम 2G, 3G, 4G से तो वाकिफ हैं, 5G उसका अगला संस्करण है। 5G से ऐसा नेटवर्क तैयार होगा जहां हर कोई हर चीज से वर्चुअली कनेक्ट(connect virtually) हो पाएगा फिर चाहे वह मशीन हो या डिवाइसेस। इसके जरिए कनेक्टिविटी की रफ्तार बेहद तेज हो जाएगी। 10 गीगाबिट्स पर सेकेंड (10 Gbps) की स्पीड से कुछ भी डाउनलोड कर सकेंगे। इसमें लेटेंसी बेहद कम होगी। नेटवर्क कैपेसिटी ज्यादा होगी। बता दें कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशंस (DoT) ने तीन दिन पहले 5G ट्रायल स्पेक्ट्रम अलॉट कर दिया है।
बढ़ता है कैंसर का खतरा
2014 में डब्लूएचओ (WHO) ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें लिखा है कि इंटरनेशनल एजेंसी फ़ॉर रिसर्च ने बतायाकि मोबाइल फ़ोन से पैदा होने वाली एलेक्ट्रोमैग्नेटिग फ़ील्ड्स(electromagnetic fields) इंसानों के लिए कैंसर के वायरस पैदा करती है। इस बात पर वैज्ञानिको ने कोई पुख्ता सबूत तो नहीं दिए हैं मगर साल 2020 की विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ वो 5जी सहित सभी रेडियो फ्रीक्वेंसी(radio frequency) के एक्सपोज़र से होने वाले स्वास्थ्य पर ख़तरे को लेकर एक रिपोर्ट अगले साल आने वाली है।
चूहे पर किया गया था अध्यन
मोबाइल की रेंज कितनी खतरनाक हो सकती है इस बात का पता साल 2018 की अमेरिकी सरकार की एक रिपोर्ट में पाया गया। इस रिपोर्ट में यह बात सामने आयी कि रेडियो फ़्रीक्वेंसी रेडिएशन के ज़्यादा एक्सपोज़र से चूहों के दिल में एक तरह का कैंसर(cancer) जैसा ट्यूमर हो गया। इस शोध के लिए चूहे के पूरे शरीर को मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन के एक्सपोज़र में दो साल तक रखा गया और हर दिन नौ घंटे ये चूहे एक्सपोज़ होते थे।
आतंक को मिलेगा बढ़ावा
एक ओर जहाँ नेट्वोर्क प्रोडूसर्स और वैज्ञानिकों के बीच छिड़ी जंग के बीच एक और चिंताजनक बात का खुलासा हुआ है जिसमें बताया गया कि दुनियाभर की सरकारें अभी हैकिंग जैसी बड़ी समस्या से जूझ रही हैं, लेकिन 5जी नेटवर्क से रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीक में इजाफा होगा। जिससे बड़े देशों के साइबर एक्सपर्ट(cyber expert) छोटे देशों के सिस्टम में आसानी से घुसपैठ कर सकेंगे। इसी के साथ आतंकी(terrorist) गतिविधियों का खतरा बढ़ने से देश की सुरक्षा में सेंध लग जाएगी। इसलिए अमेरिका, चीन, जापान और उत्तर कोरिया समेत कई देश 5जी नेटवर्क(5G network) को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं।
वैज्ञानिकों ने 2019 में ही सरकार को किया था आगाह
साल 2019 में कई भारतीय वैज्ञानिकों ने भी सरकार को 5जी के ख़िलाफ़ पत्र लिखा था। जिसमें लिखा था कि 5जी से रेडिएशन का स्तर आज के स्तर 10 से 100 गुना ज़्यादा हो जाएगा।जिससे जीव-जंतुओं पर बुरा असर पड़ेगा। उनकी जान चले जाने की भी आशंका व्यक्त की गईथी।