जिस दिन हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उसी रात कैबिनेट की पहली बैठक में निर्णय लिया गया कि पत्थलगड़ी समर्थकों के ऊपर से राजद्रोह का मुकदमा वापस लिया जाएगा। लेकिन सरकार के 13 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक सरकार उन मुकदमों को वापस नहीं ले सकी है। दूसरी ओर कई लोग अभी तक जेल में हैं। खूंटी के ग्रामसभा प्रधान अब मुख्यमंत्री को उनकी घोषणा याद दिला रहे हैं।
विवेक आर्यन
पत्थलगड़ी समर्थकों पर से राजद्रोह का मुकदमा अब तक वापस नहीं लिया जा सका है। राज्य सरकार ने इसे लेकर 29 दिसंबर 2019 में अपनी पहली कैबिनेट में ही घोषणा की थी। गृह विभाग ने 22 जनवरी 2020 को सभी संबंधित उपायुक्तों को पत्थलगड़ी मामले से जुड़े मुकदमों का विवरण मांगा था। विभाग ने कहा था कि जिन मामलों से संबंधित फाइनल फॉर्म कोर्ट में जमा नहीं किया गया है, वैसे मामलों का विवरण उपायुक्त विभाग को दे। इस विवरण में चार्जशीट में दर्ज नामों का संख्या, गिरफ्तर किये गए लोगों की संख्या आदि मांगी गई थी। बाद में सरकार की तरफ से अनुच्छेद 321 के तहत इन मामलों को वापस लेने की अनुमति अभियोजक को दी जानी थी।
जिन मामलों से संबंधित फाइनल फॉर्म कोर्ट में जमा कर दिया गया है, गृह विभाग ने उनकी समीक्षा करने का निर्देश दिया था। समीक्षा के लिए तीन लोगों की समिति बनाई गई थी, जिसमें उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और सरकारी अभियोजक सदस्य शामिल थे। इस समिति की अध्यक्षता उपायुक्त कर रहे थे। समिति को इन मुकदमों को वापस लिए जाने की अनुशंसा करने के निर्देश दिए गए थे।
तीन जिलों में 30 एफआईआर किये गए थे दर्ज
पत्थलगड़ी मामले में 200 नामजद और 10 हजार से अधिक अज्ञात लोगों पर एफआईआर किया गया था। इसमें अन्य कई धाराओं के साथ धारा 124(A) भी लगाई गई थी, जो राजद्रोह की धारा है। इस दौरान खूंटी जिलो में 23, सराइकेला खरसांवा में 5 और पश्चिमी सिंहभूम में 2 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। खूंटी में दर्ज प्राथमिकियों में से दो कोचांग दुष्कर्म से संबंधित थे। ये सभी मामले 1 जनवरी 2015 से 29 दिसंबर 2019 के बीच दर्ज किए गए हैं। हेमंत के नेतृत्व में बनी नई सरकार ने इन तमाम मामलों से धारा 124(A) और 120(A) हटाने की घोषणा की थी। 10 हजार अज्ञात लोगों पर से तो ये धाराएं घोषणा के साथ ही खत्म हो गई, जिसका अर्थ हुआ कि अब इन मामलों में किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। लोकिन 200 नामजद लोगों के उपर से अभी तक यह मुकदमा लगा ही हुआ है। यहां तक कि कई लोग इसी मामले में जेल में है।
क्यों नहीं हटाई जा सकी हैं राजद्रोह की धाराएं
सरकार की घोषणा के बाद भी एक साल में धाराएं अगर नहीं हटाई गई हैं तो जरूर इसमें कानूनी पेंच है। इन पेंच को समझने के लिए द फॉलोअप ने मासस के केंद्रीय समिति सदस्य सुशांतो मुखर्जी से बात की। सुशांतो ने बताया कि जिन 200 लोगों पर राजद्रोह की धाराएं लगी हैं, उनमें से कुछ लोगों पर मार-पीट या हिंसा सहित अन्य मामलों से संबंधित धाराएं भी लगी हैं। ऐसे में जिन लोगों पर अन्य धाराएं नहीं भी लगी है, उन्हें भी इंतजार करना होगा, क्योंकि सभी 200 नामजद लोगों के ऊपर से राजद्रोह की धाराएं एक साथ हटेंगी। सुशांतो कहते हैं कि सरकार की तरफ से कोशिश की गई है, राजद्रोह की धाराएं वापस लेने में अधिकतम चार महीने का समय लग सकता है।
दूसरी ओर विनोद कुमार, जिनपर पथलगड़ी मामले में ही देशद्रोह का मामला दर्ज है, उनका कहना है कि सरकार को जिस स्पीड से इन मामलों को वापस लिए जाने के लिए प्रयास करना चाहिए था, वह नहीं किया गया है। पथलगड़ी से जुड़े मामलों के कुछ जानकारों का कहना है कि कोर्ट में मामला जाने के बाद धाराएं वापस लेने में समस्याएं आ सकती हैं। कोर्ट इसपर संज्ञान लेते हुए अपने स्तर से धाराएं वापस करने से मना कर सकती है।
खूंटी के ग्राम प्रधानों ने मुख्यमंत्री को याद दिलाई घोषणा
पत्थलगड़ी को केंद्र रहा खूंटी जिले से पारंपरिक ग्राम प्रधानों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उन्हें उनकी घोषणा याद दिलाई है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि पिछली सरकार में उनलोगों पर फर्जी आरोप दर्ज किया गया था और क्षेत्र में मानवाधिकार का उलंघन किया गया था। यह भी लिखा है कि मुख्यमंत्री हेमंत द्वारा राजद्रोह के मुकदमों को वापस लेने की घोषणा सराहनीय है, लेकिन फिर भी अभी तक सभी के उपर से मुकदमा वापस नहीं लिया जा सका है। ग्राम प्रधानों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पत्थलगड़ी के सभी मामलों को जल्द ले जल्द वापस लिया जाए साथ ही पांचवी अनुसूची के प्रावधानों और पेसा कानून को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।