द फॉलोअप टीम, रांची:
सरायकेला खरसावां में तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग में मारे जाने की घटना ने जून 2019 में सियासी और सामाजिक भूचाल ला दिया था। तब रघुवर दास की अगुवाई वाली भाजपा सरकार सत्ता में थी। हेमंत सोरेन ने जब महागठबंधन सरकार का नेतृत्व किया, तो तबरेज की पत्नी शाइस्ता परवीन का विश्वास मजबूत हुआ था कि अब उन जैसे भटक रहे लोगों को इंसाफ मिलेगा। सीएम ने मिलकर उन्हें खुद छोटी बहन मानते हुए इंसाफ और हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया था। यह बात सत्ता संभालने के शुरुआत की है। लेकिन तब से वो हेमंत सोरेन से मिलने के लिए दौड़ ही रही हैं। पिछले दिनों द फॉलोअप से बातचीत में शाइस्ता ने बताया था कि 4 बार मुख्यमंत्री से मिलने की वो कोशिश कर चुकी हैं। लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी। उनके शब्द, मैं चार बार सीएम कार्यालय प्रोजेक्ट भवन और मुख्यमंत्री आवास तक पहुंची, लेकिन मुझे मुख्य द्वार से ही वापस लौटा दिया गया। आज सोमवार को फिर शाइस्ता विधानसभा बड़ी आस लिए पहुंची थी, आस इसलिए कि सीएम से मिलवाने के लिए कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय ही उन्हें लेकर आई थीं, लेकिन 3 से 4 घंटे इंतजार के बाद समाधान के अंतिम पायदान से ही उम्मीद लौट गई।
शाइस्ता को दीपिका पांडेय खुद लेकर आई थीं
शाइस्ता को खुद सीएम से मिलवाने के वादे के साथ महंगामा से कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय लेकर आई थीं। अब उनका कहना है कि मंत्री आलमगीर आलम से मिलवा चुकी हूं। वहीं मुख्यमंत्री से हमलोगों ने मिलकर शाइस्ता की बात रखी है। कांग्रेस के अन्य नेताओं से भी शाइस्ता मिलीं। लेकिन सवाल है कि दर्द का बोझ लिए एक विधवा को आखिर मुख्यनमंत्री से क्यों नहीं मिलने दिया गया। जब उसे हेमंत खुद छोटी बहन कहते हैं तो मिलने में दिक्कत क्या थी आखिर।
अब किससे लगाए शाइस्ता न्याय की गुहार
मॉब लिंचिंग के शिकार हुए तबरेज अंसारी की पत्नी शाइस्ता परवीन ने द फॉलोअप को बताया था कि 17 जून 2019 की रात उनके पति को भीड़ ने पीटा। पिटाई से उनकी मौत हो गयी। मामले में पुलिस और तबरेज का इलाज करने वाले डॉक्टर की भूमिका भी संदिग्ध है। तबरेज की मौत को एक साल बीत गया लेकिन आरोपियों को सजा नहीं मिली। सभी आरोपी बेल पर बाहर हैं। शाइस्ता ने कहा कि यदि सरकार उसी वक्त पूरे मामले का संज्ञान लेती। मॉब लिंचिंग को लेकर कड़ा कानून बनाती। तबरेज के हत्यारों को त्वरित सजा मिलती तो राज्य में मॉब लिंचिंग की दूसरी घटनायें नहीं होती। उन्हें अबतक न तो न्याय मिला है और ना ही सरकारी सहायता।