द फॉलोअप टीम, इलाहाबाद:
"मैं विकास सिंह अपने पूरे होशो-हवास में फांसी लगाने जा रहा हूं। नौकरी ना मिलने के कारण मैं ये कदम उठा रहा हूं। मुझसे अगर कोई भूल हुई हो तो मुझे माफ कर दीजिएगा। आप सभी लोग लवली, शिवानी मम्मी औऱ पापा मैं अच्छा बेटा नहीं बन पाया। कुछ इतने करीब हैं मेरे दिल के जिनके बारे में मैं कभी गलत नहीं सोच सकता हूं। हम उनको विश्वास दिलाते हैं कि हम उनको खुद से ज्यादा मानते हैं। आपका अपना, विकास सिंह। ये किसी फिल्म की स्क्रिप्ट या प्ले का डायलॉग नहीं है। ये चंद शब्द हैं किसी युवक के बुरी तरह टूट जाने के। पूरा माजरा है क्या, समझते हैं"।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता था विकास
इलाहाबाद के शिवकुटी में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र विकास सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। विकास ने मरने से पहले सुसाइड नोट भी छोड़ा है। इसमें साफ तौर पर लिखा है कि वो नौकरी ना मिलने की वजह से अपनी जान दे रहा है। लिखा है कि वो अच्छा बेटा नहीं बन पाया। सुसाइड नोट में युवक ने माता-पिता और अपनी बहनों का जिक्र किया है। सुसाइड नोट में उन सभी लोगों का जिक्र है जिनके लिए विकास एक उम्मीद रहा होगा। विकास भी जिनके लिए जिंदगी में कुछ बनना चाहता होगा। कुछ करना चाहता होगा। मेहनत से अपना और अपने परिवार की सुनहरी तकदीर लिखना चाहता होगा लेकिन वो केवल एक सुसाइड नोट ही लिख सका।
रोजगार नहीं मिलने से परेशान था विकास
रोजगार हर भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार की प्रारंभिक आकांक्षा है। अच्छा घर, गाड़ी, ठीक-ठाक बैंक बैलेंस, अच्छी शादी, शिक्षा या कह लीजिए कि पूरी जिंदगी। रोजगार या नौकरी ही हर मध्यमवर्गीय परिवार की प्रारंभिक आकांक्षा या जरूरत है। विकास जैसे लाखों नौजवान शहर के दबड़ेनुमा मकानों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। दाल-भात, तहरी और खिचड़ी खाकर जमकर पढ़ाई करते हैं। जमीन गिरवी रख दी जाती है। मां अपने गहनें गिरवी रख देती हैं। पिता अपनी पूरी गाढ़ी कमाई लगाते हैं। पर सरकार की नाकामी, सिस्टम की असंवेदनशीलता सब कुछ खत्म कर देती है। सारी उम्मीद. सपने। विकास पहला नहीं है। ये काफी दुखद है।
पूरे देश में ज्वलंत मुद्दा बना है रोजगार
अभी पूरे देश में ही रोजगार का मुद्दा ज्वलंत है। बीते कुछ वर्षों में भारत में 42 फीसदी लोग बेरोजगार हो गये हैं। साढ़े तीन करोड़ से भी ज्यादा लोगों की नौकरियां गई हैं। यूपी में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की बात कही जा रही है। कानून के मसौदे में लिखा है कि यदि किसी को 2 से ज्यादा बच्चे हुए तो सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। 2 बच्चों की बात तो बाद की है। सरकारी नौकरी ही कहां है। यूपी में सवा लाख से ज्यादा बेसिक शिक्षकों का पद खाली है। टेट पास किए लाखों अभ्यर्थी बहाली के इंतजार में हैं। कुछ दिन पहले ही बेरोजगार अभ्यर्थियों ने बहाली की मांग को लेकर बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया था। वहां उन्हें लाठी और गालियां मिलीं।
लाखों युवा सरकारी नौकरी की आस में हैं
लाखों लोग सरकारी नौकरियों की आस में बैठे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क परिवहन, प्रशासनिक विभाग सहित तमाम सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं। बावजूद इसके वैकेंसियां नहीं निकाली जातीं। जो वैकेंसी निकलती है उसमें हमेशा कुछ ऐसा छोड़ दिया जाता है कि मामला कोर्ट-कचहरी तक पहुंचे। कोर्ट में मामला सालों लटका रहता है। उम्र सीमा खत्म हो जाती है। बहाली नहीं होने से प्रतियोगी टूट जाते हैं जैसे कि विकास टूट गये।