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सांप से बचाव के लिए बड़ी कामयाबी, बिहार में विकसित डिवाइस को मिला इंटरनेशनल पेटेंट

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मुजफ्फरपुर

अब घरों, गोदामों और भंडारण क्षेत्रों तक सांपों की पहुंच आसान नहीं होगी। मुजफ्फरपुर में विकसित स्नेक डिटेक्टर बैरियर सांपों को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें इंसानी बस्तियों से दूर रखने में कारगर साबित होगा। यह नव-विकसित प्रणाली न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि सांपों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इस अभिनव सिस्टम के जरिए भवनों और भंडारण क्षेत्रों के आसपास सांपों की आवाजाही को रोका जा सकेगा। इससे वहां कार्यरत कर्मियों की सुरक्षा तो सुनिश्चित होगी ही, साथ ही सर्पदंश से होने वाली मौतों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। खास बात यह है कि इस तकनीक में सांपों को मारा या घायल नहीं किया जाएगा।
बिहार विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के साइंस के पूर्व डीन प्रो. मनेंद्र कुमार और पीजी जूलाजी विभाग के डॉ. ब्रज किशोर प्रसाद सिंह ने इस सर्प निवारक अवरोध (Snake Deterrent Barrier) को विकसित किया है। इस नवाचार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है और यूनाइटेड किंगडम इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस द्वारा इसके डिजाइन को पेटेंट प्रदान किया गया है।


सर्पदंश और संरक्षण—दोनों की चिंता का समाधान
प्रो. मनेंद्र कुमार के अनुसार, भारत में सांपों की करीब 300 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से केवल 60 विषधर हैं। इसके बावजूद हर साल देश में करीब 60 हजार लोगों की मौत सर्पदंश से होती है, जो वैश्विक आंकड़े का आधे से अधिक है। भय के कारण लोग विषहीन सांपों को भी मार देते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन पर खतरा बढ़ रहा है। यह उपकरण इस मानसिकता को बदलने में भी सहायक होगा।
कैसे काम करता है स्नेक डिटेक्टर बैरियर
यह उपकरण जंग प्रतिरोधी माइल्ड स्टील से बने डुअल लेयर रिपेलेंट स्टेशन पर आधारित है। प्रत्येक यूनिट एक स्व-नियंत्रित निरोधक स्टेशन की तरह काम करती है। इसके ऊपरी चेंबर में 300 ग्राम कंकड़ या रेत और 20 एमएल कार्बोलिक एसिड या लौंग, सिट्रोनेला जैसे पर्यावरण अनुकूल तेल डाले जाते हैं।
रासायनिक अभिक्रिया से निकलने वाली तीखी गंध सांपों को उस क्षेत्र से दूर रखती है। जहां तक यह गंध फैलती है, वहां से आगे सांप नहीं बढ़ पाते।


कम लागत, आसान रखरखाव
इस उपकरण की शुरुआती लागत करीब 1500 रुपये बताई गई है। मिश्रण को हर 15 दिन में रिफिल करना होगा, जिसमें 40–50 रुपये का खर्च आएगा। इसमें दो से तीन छिद्र बनाए गए हैं, जिससे नियंत्रित तरीके से गंध का प्रसार होता है।
स्मार्ट फीचर्स से लैस सिस्टम
गंध कम होने पर यह सिस्टम LED या वायरलेस सिग्नल के जरिए अलर्ट भेजता है। ठंडे मौसम में गंध प्रसार बढ़ाने के लिए इसमें वैकल्पिक सौर हीट प्लेट भी जोड़ी गई है। यह सिस्टम सुदूर और ग्रामीण इलाकों में भी आसानी से इंस्टाल किया जा सकता है और लंबे समय तक टिकाऊ है।
इस तरह यह नव-विकसित स्नेक डिटेक्टर बैरियर इंसानों और सांपों के बीच संतुलन बनाते हुए सुरक्षा और संरक्षण—दोनों की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रहा है।

Tags - Snake Bite Prevention Wildlife Protection Patented Device Eco Friendly Bihar Innovation