द फॉलोअप डेस्क
नोटबंदी और देशबंदी से भी घातक प्रक्रिया जो इस बार अपनाई गई है वो है बिहार में भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग द्वारा लाई गई वोटबंदी की प्रक्रिया। ये बातें प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने कही। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने आगे कहा कि "चुनाव आयोग कह रही है कि 36.47 प्रतिशत मतदाताओं के पुनरीक्षण का काम पूरा हो चुका है। जबकि इंटरनेट पर अपलोड केवल 11% ही हुआ है यह आंकड़ों में अंतर साफ बता रहा है कि चुनाव आयोग गलत बयानी हमारे 9 जुलाई को आहुत बंद को लेकर कर रही है। बिहार में चुनाव से पूर्व यह प्रक्रिया संचालित कर चुनाव आयोग बिहार के मतदाताओं को कंफ्यूज कर पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर काम कर रही है। जबकि बीएलओ द्वारा अब तक पूरे फॉर्म मतदाताओं तक बांटे भी नहीं गए हैं"।
कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉ शकील अहमद खान ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रही है और मतदाता सूची का इतने कम समय में पुनरीक्षण करना ही बता रहा है कि चुनाव आयोग भाजपा के द्वारा तय निर्देशन में काम कर रही है।
वहीं AICC बिहार के नेशनल मीडिया कॉर्डिनेटर अभय दुबे ने इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि "अरुण जेटली ने राज्यसभा में 22 अप्रैल 2002 में एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया सिर्फ घर छोड़कर गए लोग और जो मृत मतदाता हैं उनका नाम हटाने की प्रक्रिया है ये नागरिकता से जुड़ी प्रक्रिया नहीं है। चुनाव आयोग ने अक्टूबर 2024 से छह जनवरी 2025 तक एक समरी रिवीजन की प्रक्रिया कर 243 विधानसभा सीटों पर व्यापक सर्वे किया था और 12 लाख नए वोटर्स के नाम जोड़े गए थे और चार लाख लोगों के नाम काटे गए थे जिसके बाद सात करोड़ 80 लाख मतदाताओं की सूची जारी की गई थी। नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए 18 जून तक ऑनलाइन प्रक्रिया जारी थी। साथ ही एक अक्टूबर तक की तिथि नए मतदाताओं को पंजीकृत होने के लिए दी गई थी। नए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 के तहत आधार कार्ड को मान्य किया गया था। कोई दस्तावेज नहीं होने की स्थिति में सरपंच या वार्ड के द्वारा सत्यापित पहचान को वैध माना गया था"।
जानकारी के लिए बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग के द्वारा शुरू की गई वोटरलिस्ट अपग्रेडेशन की प्रक्रिया को लेकर घमासान मचा हुआ है। सभी राजनीतिक पार्टियां इसे सरकार का षड्यन्त्र बता रही है। वहीं निर्वाचन आयोग के तरफ से कई बार सफाई दी जा रही है।