पटना
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मोर्चे पर बिहार की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो पाया है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, बिहार देश के 29 राज्यों में FDI आकर्षित करने के मामले में 25वें स्थान पर रहा। निवेश के लिहाज से बिहार न सिर्फ औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों से पिछड़ा है, बल्कि झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों से भी काफी पीछे नजर आया है।
2025 में बिहार को मिला सिर्फ 6.09 करोड़ का निवेश
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में देशभर में कुल 3 लाख 84 हजार 369 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दर्ज किया गया। इसमें बिहार का हिस्सा केवल 6 करोड़ 9 लाख रुपये रहा। यह आंकड़ा राज्य के औद्योगिक माहौल और निवेश आकर्षित करने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बिहार से अलग होकर बने झारखंड ने भी 85 करोड़ 90 लाख रुपये का FDI हासिल कर बिहार को पीछे छोड़ दिया।

यूपी और बंगाल से काफी पीछे बिहार
पड़ोसी राज्यों की तुलना करें तो उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2025 में 7,078 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल ने 2,463 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया। इन आंकड़ों से साफ है कि निवेशकों का भरोसा बिहार की अपेक्षा अन्य राज्यों पर कहीं अधिक है।
सीमित जिलों तक सिमटा विदेशी निवेश
हालांकि, बिहार में कुछ चुनिंदा परियोजनाओं के जरिए सीमित विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। जापान की रिब्राइट पार्टनर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड ने नालंदा जिले में अंडा उत्पादन इकाई लगाने के लिए नूपा टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है, जिसके तहत जापान से 4 करोड़ 5 लाख रुपये का निवेश आया है। वहीं, अमेरिका की कंपनी हेल्थ आरएक्स इंक ने गया जिले में 85 लाख रुपये का निवेश कर आईटी और कंप्यूटर सेवाओं से जुड़ा सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है। बिहार के नालंदा, गया, पटना, बेगूसराय और नवादा—इन पांच जिलों में ही यह सीमित विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। कुल मिलाकर राज्य में FDI की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि जब तक बुनियादी ढांचे में सुधार, निवेश-अनुकूल नीतियां और प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल नहीं बनाया जाता, तब तक बिहार के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आकर्षित करना मुश्किल रहेगा।
