द फॉलोअप डेस्क
बिहार में पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में अब एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब पासपोर्ट बनाने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन के लिए अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (CCTNS) का सहारा लिया जाएगा। इससे पुलिस वेरिफिकेशन में अधिक पारदर्शिता और तेजी आएगी। इसके अलावा विभिन्न थानों के बीच आपसी जानकारी साझा करना भी अब और आसान हो जाएगा।
आपराधिक रिकॉर्ड छुपाना होगा मुश्किल
यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि पासपोर्ट के आवेदनकर्ता का आपराधिक रिकॉर्ड छुपाना अब मुश्किल हो जाएगा। पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान पुलिस अब CCTNS की मदद से एक थाने से दूसरे थाने तक त्वरित और सटीक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे पूरे वेरिफिकेशन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी।
इस नई प्रक्रिया के तहत थानों के पुलिस अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इस महीने के पहले सप्ताह में पटना के पुलिस मुख्यालय में पटना जिले के सभी थानों के अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया था, जिसमें क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के अधिकारी भी शामिल हुए। गौरतलब है कि राज्य के लगभग सभी थाने अब CCTNS से जुड़े हुए हैं।
बिहार पुलिस कर रही ऐप का इस्तेमाल
अब, अगर राज्य के किसी भी थाने में किसी व्यक्ति पर आपराधिक मामला दर्ज है, तो उस जानकारी को किसी अन्य जिले के थाने से आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा। पासपोर्ट के लिए आवेदन करने पर, पुलिस अधिकारी आवेदक का नाम और तस्वीर CCTNS पर अपलोड कर उसकी जांच करेंगे। इसके साथ ही पासपोर्ट निर्माण प्रक्रिया को और तेज बनाने के लिए बिहार पुलिस पहले से ही एम पासपोर्ट पुलिस ऐप का इस्तेमाल कर रही है।
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