पटना
बिहार सरकार ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 71,297 प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को अब वार्षिक परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।
राज्य के इन विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 1 करोड़ 33 लाख 73 हजार 284 बच्चों की ग्रेडिंग की जाएगी। परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर छात्रों को A से लेकर E ग्रेड तक दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह है कि जिन बच्चों को C, D और E ग्रेड मिलेगा, उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि उन्हें आगे चलकर A और B ग्रेड की श्रेणी में लाया जा सके। शिक्षा विभाग के अनुसार यह नई व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से राज्य के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में लागू कर दी जाएगी। अभी इस तरह की ग्रेडिंग प्रणाली सीबीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालयों में लागू है।

दरअसल, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद बिहार में स्कूली शिक्षा में कई बदलाव किए जा रहे हैं। कक्षाओं में पढ़ाई और मूल्यांकन में बढ़ती असमानता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है।
इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। अप्रैल महीने में सभी विद्यालयों को ग्रेडिंग की विस्तृत योजना उपलब्ध करा दी जाएगी। भविष्य में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।

इस आधार पर होगी ग्रेडिंग
• 81 से 100 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्रों को A ग्रेड
• 61 से 80 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्रों को B ग्रेड
• 41 से 60 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्रों को C ग्रेड
• 33 से 40 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्रों को D ग्रेड
• 0 से 32 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्रों को E ग्रेड
इस नई व्यवस्था के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि कमजोर छात्रों की पहचान कर उनकी पढ़ाई में सुधार किया जा सके, ताकि सभी बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
