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बिहार में बाढ़ का कहर : पटना के 24 गांव जलमग्न, फसलें तबाह और लोग बेहाल

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पटना 
लगातार चार दिनों से हो रही बारिश के कारण पटना के धनरुआ प्रखंड में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। पांच नदियों के उफान पर आने से 24 गांवों में पानी घुस गया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। करीब 1600 एकड़ में खड़ी धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। कई जगहों पर तटबंध टूट गए हैं और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने में भी मुश्किल हो रही है।


धनरुआ प्रखंड से होकर बहने वाली कररूआ, भूतही, महताइन, बलदाही और लोकाईन नदियों का जलस्तर शनिवार रात से तेजी से बढ़ा है। फल्गु नदी के उफान के कारण इन सहायक नदियों में बाढ़ आ गई, जिससे बहरामपुर, छाती, पभेड़ा और विजयपुरा पंचायत के गांव जलमग्न हो गए। आतापुर में तटबंध टूटने से पानी ने तेजी से रिहायशी इलाकों में दस्तक दी। सड़कों पर घुटनों तक पानी भरा है, जिससे लोगों का आना-जाना बंद हो गया है। कई गांवों में बिजली भी बंद हो गई है।


धान की फसलें डूबीं, मवेशियों के लिए चारे का संकट
बाढ़ से किसानों को सबसे बड़ा झटका लगा है। किसानों ने बताया कि यह धान की दूसरी रोपनी थी, जिसमें काफी मेहनत और खर्च लगा था, लेकिन सब बर्बाद हो गया। लगभग 1600 एकड़ की फसल डूब गई है। साथ ही मवेशियों के लिए चारे की भारी किल्लत हो गई है। कई गांवों में तो मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों ने जल्द राहत और मुआवजे की मांग की है। पटना के दीघा घाट, गांधी घाट और मोकामा में गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है और खतरे के निशान से महज कुछ मीटर नीचे है।


 

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