द फॉलोअप डेस्क
मोकामा से जदयू विधायक चुने गए अनंत सिंह ने मंगलवार को बिहार विधानसभा में विधायक पद की शपथ ली। स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से विधानसभा लाया गया। खास बात यह रही कि अनंत सिंह ने शपथपत्र पढ़े बिना ही सदन में शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद अनंत सिंह सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचे और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके माथे पर लाल रंग का लंबा टीका लगा हुआ था, जिसे देखकर मुख्यमंत्री ने उनसे टीका लगाने का कारण भी पूछा। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने भी वे हाथ जोड़कर खड़े नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम को सदन में मौजूद सभी सदस्यों ने देखा।इसके बाद अनंत सिंह अपनी निर्धारित सीट पर जाकर बैठ गए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अस्वस्थ होने के कारण शपथ लेने में उन्हें देरी हुई। उन्होंने बताया कि अदालत से अनुमति मिलने के बाद ही वे विधानसभा पहुंच सके हैं। अनंत सिंह ने स्पष्ट किया कि जेल से बाहर आना उनके नियंत्रण में नहीं है और जब तक अदालत अनुमति नहीं देगी, वे न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे।

पटना सिविल कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह के शपथ ग्रहण का मार्ग प्रशस्त हुआ, हालांकि अदालत ने उन्हें केवल शपथ लेने की अनुमति दी थी। दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें अब तक जमानत नहीं मिल सकी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शपथ समारोह के अलावा वे किसी अन्य गतिविधि में भाग नहीं ले सकते। शपथ लेने के बाद उन्हें वापस बेऊर जेल भेज दिया जाएगा, जहां वे पुनः न्यायिक हिरासत में रहेंगे।अनंत सिंह को जेल से विधानसभा तक लाने और वापस ले जाने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। एस्कॉर्ट वाहन, क्विक रिस्पॉन्स टीम की तैनाती के साथ विधानसभा परिसर के भीतर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल मौजूद रहा। सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई और समर्थकों के किसी भी प्रकार के जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। प्रवेश द्वारों पर सघन जांच की गई।

गौरतलब है कि अनंत सिंह पिछले करीब तीन महीनों से बेऊर जेल में बंद हैं। पटना सिविल कोर्ट पहले ही उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका है। इसके बाद उन्होंने 24 दिसंबर को पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन जिस पीठ में मामला सूचीबद्ध हुआ, वहां के न्यायाधीश ने सुनवाई से इनकार कर दिया। फिलहाल मामला दूसरी पीठ में सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया में है और जमानत पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। संविधान के अनुच्छेद 188 के अनुसार किसी भी विधायक के लिए पदभार ग्रहण करने से पहले शपथ लेना अनिवार्य है। शपथ लिए बिना कोई भी विधायक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकता और न ही उसे वेतन व भत्तों का अधिकार मिलता है। अनुच्छेद 193 के तहत बिना शपथ सदन में शामिल होने पर जुर्माने का प्रावधान है। इसी कारण अनंत सिंह के लिए शपथ लेना आवश्यक था। शपथ के साथ ही उनकी विधायकी की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो गई।