पटना
बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर प्रदेश के श्रमिकों को शुभकामनाएं दी। साथ ही राज्य की एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। तेजस्वी यादव ने लिखा कि देश के निर्माण में अपना पसीना बहाने वाले श्रमवीरों के बिना 'विकसित भारत' की कल्पना करना बेईमानी है।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल
तेजस्वी यादव ने लिखा कि राज्य के विकास की नींव रखने वाले मजदूरों की बेहतरी पर सकारात्मक चर्चा का अभाव बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक श्रमिक और उनके परिवारों की प्रगति नहीं होगी, तब तक सच्चे अर्थों में विकास संभव नहीं है। इस दौरान आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अपनी निष्ठा, समर्पण, सेवा भाव व पसीने से देश निर्माण में अतुलनीय योगदान देने वाले श्रमवीरों को “अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस” की हार्दिक शुभकामनाएं।
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) May 1, 2026
देश के विकास की नींव रख उसे प्रगति पथ पर ले जाने वाले श्रमिक भाइयों के उत्थान और बेहतरी पर सकारात्मक चर्चा का अभाव पीड़ादायक है।… pic.twitter.com/XeVYRO9Q1Y
तेजस्वी ने पलायन पर चिंता जाहिर की
तेजस्वी ने कहा कि पिछले 21 वर्षों से बिहार में काबिज एनडीए सरकार की 'पूंजीपरस्त' और 'गरीब विरोधी' नीतियों के कारण हर साल लगभग 4 करोड़ लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने राज्य में बढ़ते पलायन को लेकर चिंता जाहिर की है। कहा कि यह पलायन न केवल भयावह है, बल्कि बिहारी अस्मिता के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों में बिहार के श्रमिकों को अक्सर अपमान और हिंसा का सामना करना पड़ता है। साथ ही नोटबंदी, लॉकडाउन और वर्तमान गैस संकट का भी जिक्र किया। कहा कि हर आपदा की मार सबसे पहले बिहार के प्रवासी मजदूरों पर ही पड़ती है।

बिहार का नाम बदलकर श्रमिक प्रदेश कर दे सरकार
इस दौरान अपने ट्वीट में उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा पर तीखा कटाक्ष करते हुए उन्हें 'नाम बदलने का विशेषज्ञ' बताया। साथ ही सुझाव दिया कि अगर सरकार पलायन रोकने में सक्षम नहीं है, तो उन्हें 'श्रमिक दिवस' के जगह नाम बदलकर 'बिहार समर्पित दिवस' या बिहार का नाम ही 'श्रमिक प्रदेश' कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार औद्योगिक उत्पादन में तो नगण्य है ही, लेकिन श्रमिकों की सप्लाई में भी अव्वल बना दिया गया है। बहरहाल अंत में, उन्होंने बिहार से पलायन रोकने और श्रमिकों के जीवन में गुणात्मक सुधार लाने के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया।