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शिक्षा मंत्री-के के पाठक विवाद में नीतीश की एंट्री, CM आवास में बुलाई आपात बैठक

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द फॉलोअप डेस्क
बिहार के शिक्षा विभाग में घमासान जारी है। विभाग मंत्री प्रो. चंद्रशेखर और विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के बीच का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस विवाद के बीच सीएम नीतीश की एंट्री हुई है। सीएम ने आज दोनों को मीटिंग के लिए बुलाया था। करीब आधे घंटे तक उनके बीच बात हुई। हालांकि इस दौरान क्या बातचीत हुई इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। सीएम से मिलकर निकले शिक्षा मंत्री से जब मीडिया ने सवाल किया कि अंदर क्या बातचीत हुई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मैं तो यहां विभाग से जुड़ी कुछ बात करने आया था। आप क्या कह रहे हैं मुझे नहीं पता। बता दें कि शिक्षा मंत्री आज सुबह लालू यादव के दिल्ली रवाना होने से पहले राबड़ी आवास पर उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे। 


शिक्षा मंत्री ने भेजा पीत पत्र
दरअसल, बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने शिक्षा विभाग के अपर सचिव के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पीत पत्र लिखा था। इस पीत पत्र में आरोप लगाया गया था कि बिना मंत्री से बातचीत किए विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक फैसले ले रहे हैं। जिससे सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विभाग की तरफ से मंत्री के पीत पत्र का जवाब देते हुए केके पाठक ने चंद्रशेखर के आप्त सचिव पर ही सवाल उठा दिया और शिक्षा विभाग में उनकी एंट्री पर रोक लगा दिया। इस विवाद ने सियासी रूप ले लिया है और सरकार की खूब फजीहत हो रही है।


जदयू-राजद आमने सामने
इस मामले को लेकर जदयू-राजद आमने-सामने खड़ी हो गई है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि के के पाठक अच्छा काम कर रहे हैं। शिक्षा विभाग में उन्होंने काफी सुधार किया है। इस पर राजद ने जवाब दिया। राजद प्रवक्ता भाई वीरन्द्र ने कहा कि के के पाठक को होश में रहकर काम करना चाहिए। ऐसे अफसरों का कान पकड़कर बाहर निकालना चाहिए।


कहां से शुरू हुआ विवाद
एक माह पहले कड़क छवि के आईएएस अधिकारी केके पाठक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बनाए गए हैं। इसके बाद से ही उनके द्वारा दिए गए कई आदेशों से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। इसके बाद ही शिक्षा मंत्री और अपर मुख्य सचिव के बीच तनातनी की चर्चा खुलकर सामने आई थी।शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने अपर मुख्य सचिव के के पाठक को पीत पत्र भिजवाया है। तीन पन्नों के इस लेटर में शिक्षा मंत्री ने केके पाठक को जमकर हड़काया है। इस लेटर के जारी होने के बाद केके पाठक के समर्थन और विरोध में जदयू और राजद आमने-सामने आ गई है।

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