पटना/बिहार
राजद ने अपना उम्मीदवार की पत्ता खोलते हुए पूर्व विधान परिषद सदस्य और पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील सिंह को मैंदान में उतार दिया है। बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होने हैं। इसमें एक उपचुनाव की सीट भी शामिल है। नामांकन दाखिल करने की आज अंतिम तारीख है। सोमवार को वे अकेले विधानसभा नामांकन करने पहुंचे। इस दौरान मीडिया के सामने उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें दूसरी बार मौका दिया है। सुनील सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का मुंहबोला भाई माना जाता है। इसे लेकर बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

संख्या बल की चुनौती
विधान परिषद चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को करीब 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में 25 विधायकों वाली राजद के सामने संख्या बल की चुनौती बनी हुई है। अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी को कांग्रेस, एआईएमआईएम और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। यही वजह है कि महागठबंधन के भीतर लगातार मंथन और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा जारी है।

सभी की नजरें अंतिम दिन के समीकरणों पर
राजनीतिक जानकारों की माने तो मौजूदा विधानसभा गणित के आधार पर महागठबंधन के खाते में एक सीट आने की संभावना सबसे अधिक है। वहीं सत्ताधारी एनडीए अपने मजबूत संख्या बल के दम पर बढ़त की स्थिति में दिखाई दे रहा है। नामांकन के अंतिम दिन विधानसभा परिसर में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहेंगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विपक्ष अपनी एकजुटता कितनी प्रभावी ढंग से दिखा पाता है। साथ ही इस चुनावी मुकाबले में कौन-सा गठबंधन अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने में सफल रहता है।