द फॉलोअप,बिहार
RJD में उम्मीदवार चयन पर रोहिणी आचार्या ने उठाया सवाल कहा- 'गुटबाजी-विश्वासघात करने वालों को टिकट क्यों?' राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने पार्टी के उम्मीदवार चयन को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। रोहिणी ने अपने पोस्ट में उम्मीदवार का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन उन्होंने सुनील सिंह की ओर इशारा किया है। उन्होंने लिखा कि कुछ लोगों के व्यवहार और गतिविधियों के कारण पार्टी को पहले भी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। बावजूद इसके विवादित चेहरों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
गुटबाजी - भीतरघात - विश्वासघात , मक्कारी जिसकी फितरत , विरोधियों से जिसकी मिलीभगत , नजदीकियों की बात बता कर उगाही - वसूली करना जिसका धंधा, जो अपनी झूठी धौंस जताने के लिए पार्टी कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ताओं - पदाधिकारियों को सामने बिठा कर बहन - बेटियों के बारे में ओछी -…
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) June 8, 2026
ऐसे लोगों से पार्टी को पहले भी हुआ नुकसान
रोहिणी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पर गुटबाजी, भीतरघात, विश्वासघात और विरोधियों से मिलीभगत जैसे आरोप लगे हों उसे पार्टी का उम्मीदवार बनाना पार्टी के लिए नुकसान है। जिस व्यक्ति की कार्यशैली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, उसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपना समझ से परे है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या पार्टी में समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की कमी हो गई है। अपने पोस्ट में रोहिणी ने दावा किया कि कुछ लोगों के व्यवहार और गतिविधियों के कारण पार्टी को पहले भी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच ऐसे फैसलों को लेकर असंतोष और नाराजगी है। रोहिणी का कहना है कि बीते वर्षों में हुए राजनीतिक नुकसान से सबक लेने की जरूरत है, लेकिन इसके बावजूद विवादित चेहरों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

जमीनी नेताओं की अनदेखी पर उठाए सवाल
रोहिणी ने आगे लिखा कि पार्टी की स्थापना से लेकर आज तक अनेक समर्पित, सम्मानित और जमीनी स्तर पर सक्रिय नेता एवं कार्यकर्ता राजद के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से अल्पसंख्यक, यादव, दलित, पिछड़े और वंचित समाज से आने वाले अनुभवी एवं युवा नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी लगातार अनदेखी चिंता का विषय है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे फैसले पार्टे के हित में नहीं हैं। संगठन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।