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बिहार विधानसभा में हंगामा, विपक्ष ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर पूछा - कहां है कैशलेस इलाज ?

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द फॉलोअप डेस्क

बिहार विधानसभा में बजट सत्र का आज चौथा दिन है। इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से अपना- अपना पक्ष रखा जाएगा। इस सत्र में विधायकों और सांसदों की ओर से कई विभागों के प्रश्न भी पूछे जाएंगे। साथ ही इस सत्र में विपक्ष आज कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। बताते चलें कि, अलीनगर विधानसभा से विधायक मैथिली ठाकुर ने विधानसभा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई सवाल उठाए। मैथिली ने अपने क्षेत्र में डॉक्टर, नर्स और ड्रेसर की पदस्थापना नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब अस्पतालों में स्टाफ ही नहीं है तो लोगों को इलाज कैसे मिलेगा। मैथिली के इस प्रश्न पर जवाब देते हुए प्रभारी मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने सदन को बताया कि बिहार तकनीकी सेवा आयोग की अनुशंसा के आधार पर 624 विशेषज्ञ डॉक्टर और 575 सामान्य चिकित्सकों की नियुक्ति और पदस्थापना की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 11,389 स्टाफ नर्स और 3,326 ड्रेसर की नियुक्ति के लिए आयोग को अधियाचना भी भेजी गई है। इन सभी पदों के लिए लिखित परीक्षा हो चुकी है और अनुशंसा मिलते ही पदस्थापना कर दी जाएगी।

वहीं, स्वास्थ्य केंद्र के जर्जर भवन को लेकर मंत्री के जवाब पर असंतोष जताते हुए मैथिली ठाकुर ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री खुद आकर स्थिति देखें। उन्होंने कहा कि बचपन से ही वह इस क्षेत्र की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था देख रही हैं लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए। वहीं, विधानसभा में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा को लेकर भी जोरदार बहस हुई। विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार कैशलेस इलाज का वादा करती है, लेकिन हकीकत में मरीजों से जांच के लिए पैसे लिए जाते हैं और कई बार रसीद तक नहीं मिलती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री ने कैशलेस इलाज की बात कही है, तो फिर लोगों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा। इस पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार कैशलेस सुविधा से सहमत है, लेकिन इसमें कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं, जैसे एडवांस में भुगतान की समस्या। सम्राट चौधरी के जवाब से असंतुष्ट राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने साफ कहा कि सिर्फ कैशलेस सुविधा चाहिए, घुमाने वाली बात नहीं।

बीजेपी विधायक जिवेश मिश्र ने भी कैशलेस व्यवस्था में खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि दिल्ली एम्स से प्रमाणित कागज होने के बावजूद सदस्यों को परेशान किया जाता है। वहीं, विधायक आईपी गुप्ता ने बिहार में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य का स्वास्थ्य व्यवस्था पर खर्च झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी कम है। राज्य का स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रति व्यक्ति सालाना खर्च 701 रुपए है, जबकि झारखंड में 1014 और पश्चिम बंगाल में 1346 रुपए खर्च होते हैं।
इस पर प्रभारी मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने बताया कि नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2023 के अनुसार बिहार सरकार का स्वास्थ्य बजट लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019-20 में यह 8477 करोड़ रुपए था, जो 2024-25 में बढ़कर 15,488 करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने कहा कि बिहार अपने GSDP का 1.5 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च कर रहा है, जो झारखंड और पश्चिम बंगाल से अधिक है।

 

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