द फॉलोअप डेस्क
बिहार की सियासत बुधवार को अचानक गर्मा गई। जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार राजभवन पहुंचे। सुबह-सुबह नीतीश कुमार राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिलने पहुंचे। उनके निकलने के तुरंत बाद सुशील मोदी वहां पहुंचे। राज्यपाल से मिलने का दोनों नेताओं का क्या उद्देश्य है यह अभी सामने नहीं आया है । लेकिन बिहार में राजनीति हलचल बढ़ गई। दरअसल 29 जून को गृहमंत्री अमित शाह बिहार आ रहे हैं। ऐसे में नीतीश कुमार को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी है। कहा जाता है कि नीतीश कुमार को दूर की सोचना वाले नेता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि राजद में सबकुछ ठीक नहीं होने के कारण कहीं नीतीश फिर से पाला न बदल लें। वहीं राज्य में कयासबाजी का बाजार गर्म हो गया है।

मानसून सत्र या कैबिनेट विस्तार
राज्यपाल से सीएम नीतीश कुमार की मुलाकात को लेकर पहले बिहार विधान मंडल का मानसून सत्र या कैबिनेट विस्तार पर चर्चा की बात सामने आयी। लेकिन, उनके निकलते ही सुशील मोदी के राज्यपाल से मिलने पहुंचने के बाद बिहार में कई प्रकार की अटकलों पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि राजनीतिक गलियारे में चल रही अटकलों पर किसी प्रकार का कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है।

सुशील मोदी ने दिया ये बयान
हालांकि, राजभवन से बाहर निकलने के बाद सुशील मोदी ने मीडिया से बातचीत की और कहा कि ये महज एक संयोग है। इसका कोई और मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। सुशील मोदी ने कहा कि यह संयोग की बात है कि मुझसे पहले सीएम आए थे। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मेरी शिष्टाचार भेंट थी। हम दोनों कॉलेज के दिनों में विद्यार्थी परिषद के सदस्य रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल बेहतर ढंग से विश्वविद्यालयों को चला रहे हैं। उसी की बधाई देने आया था।
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