द फॉलोअप डेस्क
बिहार के पूर्णिया जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र के रंगपूरा दक्षिण पंचायत स्थित कजरा गांव में एक महिला पर डायन होने का आरोप लगाकर कुछ दबंगों ने उसे ईंट और पत्थरों से हमला किया। पीड़िता मीरा देवी ने बताया कि 10 जुलाई को दोपहर लगभग 12 बजे, प्रमोद साह अपने पांच साथियों के साथ उनके घर पहुंचे और डायन कहकर गाली-गलौज करने लगे। इसके बाद उन पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले से घबराकर मीरा देवी ने खुद को अपने घर में बंद कर लिया और मीरगंज थाना को इस घटना की सूचना दी।
मीरगंज थाना के थानाध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने पुष्टि की कि इस मामले में प्रमोद साह सहित कुल छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पूर्णिया जिले के ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास की जड़े अब भी मजबूत हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे पहले पूर्णिया जिले 7 जुलाई को टेटमा गांव में रविवार की रात डायन होने के शक में एक आदिवासी परिवार के 5 लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई थी। प्रशासन के लिए यह समय की आवश्यकता बन गई है कि वह लगातार जागरूकता अभियान चलाए, ताकि इस तरह की अमानवीय घटनाओं को रोका जा सके।
डायन प्रथा केवल पूर्णिया जिले में ही नहीं, बल्कि बिहार, झारखंड, असम, ओडिशा सहित कई अन्य राज्यों में एक गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई है। यह केवल महिलाओं के खिलाफ हिंसा का कारण नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है। इस पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार ने कड़े कानून बनाए हैं। बिहार में 1999 में डायन प्रथा विरोधी कानून लागू किया गया था, जिसके तहत IPC की धारा 302, 307 और 120B के तहत मामले दर्ज किए जा सकते हैं। बावजूद इसके, ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी के कारण यह प्रथा अभी भी जारी है।
