logo

बेतिया के DEO के पास कहां से आये इतने पैसे, ठेकेदारों ने पटना से लेकर दिल्ली तक में बनाई संपत्ति 

deo3.jpg

द फॉलोअप डेस्क 

बेतिया के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) रजनीकांत प्रवीण के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान 3.6 करोड़ रुपये नकद बरामद होने के बाद पूरे बिहार में हड़कंप मच गया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी रकम कहां से आई? शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर पहले भी आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस छापेमारी के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सरकारी धन के दुरुपयोग का स्तर कितना गंभीर है। सूत्रों के अनुसार, DEO के करीबी सप्लायरों ने भी भारी संपत्ति अर्जित की है। खासतौर पर मोतिहारी के एक सप्लायर का नाम चर्चा में है, जिसने अपने "हाकिम" के साथ मिलकर सरकारी फंड का जमकर दोहन किया।
सरकारी धन की बंदरबांट, सप्लायर्स ने उठाया लाभ
सूत्रों के अनुसार, हाल के वर्षों में शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए बड़ी धनराशि आवंटित की थी। लेकिन जानकारों का कहना है कि इस राशि का बड़ा हिस्सा गबन कर लिया गया। अधिकारियों और सप्लायर्स की मिलीभगत से बेतिया और मोतिहारी में यह खेल बड़े पैमाने पर खेला गया। बताया जाता है कि मोतिहारी के एक सप्लायर  ने अधिकारियों से सांठगांठ कर करोड़ों रुपये का लाभ उठाया। भ्रष्टाचार की शिकायतें तो आईं, लेकिन उन्हें दबा दिया गया। अब, रजनीकांत प्रवीण के ठिकानों से मिली बेहिसाब संपत्ति के बाद यह मांग तेज हो गई है कि संबंधित सप्लायर्स की भी जांच की जाए।
23 जनवरी को हुई थी छापेमारी, करोड़ों की नकदी बरामद
23 जनवरी को विशेष निगरानी इकाई ने रजनीकांत प्रवीण के बेतिया, दरभंगा और मधुबनी स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान DEO के विभिन्न ठिकानों से कुल 3 करोड़ 56 लाख 22 हजार रुपये नकद मिले। इनमें से 3 करोड़ 60 हजार रुपये उनकी पत्नी सुषमा कुमारी के दरभंगा स्थित आवास से और 55 लाख 62 हजार रुपये बेतिया के आवास से बरामद किए गए। इसके अलावा, छापेमारी में लाखों के गहने और कई शहरों में जमीन-जायदाद के दस्तावेज भी मिले।
शिक्षा विभाग में कमीशनखोरी का खेल जारी
शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसका स्तर बढ़ता ही जा रहा है। सरकारी स्कूलों में सुधार और संसाधनों की बढ़ोतरी के लिए करोड़ों रुपये आवंटित किए जाते हैं, लेकिन ये राशि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से हड़प ली जाती है। बेंच-डेस्क से लेकर स्कूल भवनों के निर्माण और मरम्मत तक, हर जगह कमीशनखोरी का बोलबाला है। बेतिया के DEO का मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि किस तरह से सरकारी अधिकारी धन अर्जित कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार के प्रतीक बनते अधिकारी
रजनीकांत प्रवीण का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में मौजूद अन्य भ्रष्ट अधिकारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। बताया जाता है कि हाल के वर्षों में बिहार के कई DEO ने अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक "छोटी मछली" है, जबकि बड़ी मछलियां अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या अन्य अधिकारियों एवं सप्लायर्स की भी जांच होगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
 

Tags - BIHARBIHARNEWSBIHARPOSTDEOBETIYAEDUCATIONDEPARTMENT