रांची
झारखंड को देश में निवेश और डिजिटल नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आगामी 8 और 9 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित 'नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026' में राज्य का विजन पेश करेंगे। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री राज्य के महत्वाकांक्षी 'डिजिटल रोडमैप' के साथ-साथ अगले पांच वर्षों (2026-31) के लिए प्रस्तावित 'ड्राफ्ट एआई पॉलिसी-2026' को भी देश-विदेश के दिग्गज टेक लीडर्स के सामने रखेंगे। इस कार्यक्रम में पहली बार राष्ट्रीय मंच पर रांची आईटी पार्क को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में प्रमोट किया जाएगा, जहां निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 50% पूंजीगत सब्सिडी और 100% स्टांप व बिजली शुल्क में छूट जैसे बड़े नीतिगत फायदों की पेशकश की जाएगी।
हर साल तैयार होंगे 20 हजार आईटी ग्रेजुएट्स
इस विशेष कार्यक्रम के दौरान पहली बार रांची आईटी पार्क को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में पेश किया जाएगा। राजधानी के कोर कैपिटल एरिया में आईआईएम रांची और बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के समीप स्थित यह आईटी पार्क करीब 100.97 एकड़ विवादमुक्त सरकारी भूमि पर विकसित होने के लिए प्रस्तावित है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार झारखंड आईटी नीति-2023 के तहत 50 प्रतिशत पूंजीगत निवेश प्रतिपूर्ति, 100 प्रतिशत स्टांप शुल्क छूट और 100 प्रतिशत बिजली शुल्क छूट जैसे बड़े प्रोत्साहनों को प्रमुखता से सामने रखेगी। साथ ही, सरकार का दावा है कि राज्य में हर वर्ष 20 हजार से अधिक आईटी स्नातक तैयार हो रहे हैं, जो उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराएंगे। इस कंसल्टेशन के दौरान वर्ष 2026-31 के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट एआई पॉलिसी-2026 पर भी हितधारकों से महत्वपूर्ण सुझाव लिए जाएंगे।
मुख्य बाते
पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर रांची आईटी पार्क का निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत होगा।
100.97 एकड़ में विकसित होगा रांची आईटी पार्क।
आईटी नीति-2023 के तहत 50% पूंजीगत निवेश प्रतिपूर्ति का प्रावधान।
100% स्टांप शुल्क और 100% बिजली शुल्क में छूट की सुविधा।
ड्राफ्ट एआई पॉलिसी-2026 (2026-31) पर हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में स्टेट एआई मिशन बनाने का प्रस्ताव।
जैपआइटी को नोडल एजेंसी और झारखंड एआई क्लाउड विकसित करने की योजना।
सुशासन, कृषि, स्वास्थ्य और खनिज संसाधन प्रशासन एआई के चार प्रमुख फोकस क्षेत्र।
विभागीय आंकड़ों का एकीकरण और एआई आधारित निर्णय प्रणाली विकसित की जाएगी।