द फॉलोअप डेस्क
दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर काफी चर्चा हो रही है। दरअसल तिब्बती बोद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। लेकिन चीन इस पर आपत्ति जताते हुए इसे खारिज करने की योजना बना रहा है। और कहा है कि उनके पुनर्जन्म को लेकर अब चीन के सरकार की मंजूरी की जरूरत है। चीन ने आगे कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर उन्हें चीन के कानूनों और नियमों का पालन करना होगा साथ ही ऐतिहासिक परंपराओं का भी पालन करना होगा। वहीं मौजूदा दलाई लामा ने बताया कि दलाई लामा के चुनने की प्रक्रिया व संस्था आगे भी जारी रहेगी। दलाई लामा ने यह भी बताया कि अगले दलाई लामा को मान्यता देने की ज़िम्मेदारी गादेन फोडरंग ट्रस्ट को होगी, जो उन्हीं के संगठन का एक हिस्सा है। 
बता दें कि बीते दिन रविवार को मौजूदा दलाई लामा का 90वां जन्मदिन था जिसमें यह कयास लगाए जा रहे थे कि नए उत्तराधिकारी को लेकर कोई घोषणा की जा सकती है। लेकिन दलाई लामा के इस खबर के बाद चीन से लेकर पूरे विश्व में हलचल मच गई है। वहीं अपने बयान से उन्होंने चीन में एक टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने कहा है कि यदि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन होता है तो वह चीन के बाहर पैदा होगा। यदि बीजिंग में इसके उत्तराधिकारी के चयन की कोशिश की जाती है तो उस व्यक्ति को अस्वीकार किया जाए। दरअसल परंपरागत रूप से देखा जाए तो नए दलाई लामा का चयन मौजूदा दलाई लामा की मृत्यु के पश्चात पुनर्जन्म के सिद्धांत पर किया जाता है। 
दलाई लामा का इतिहास
दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के गेलुग संप्रदाय के सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता होते हैं। जिसकी परंपरा की शुरुआत 1578 ई. में हुई थी। जिन्हें अल्तान खान द्वारा "ज्ञान का महासागर" उपाधि से नवाजा गया था। उन्हें बोधिसत्व अवलोकितेश्वर का अवतार माना जाता है। वर्तमान के 14वें दलाई लामा तेनज़िन ग्यात्सो का जन्म 1935 में हुआ था और उन्हें केवल 4 वर्ष कई उम्र में 14वें दलाई लामा के अवतार के रूप में चुना गया था। 1959 में चीन के द्वारा तिब्बत पर कब्जा किए जाने के बाद वे भारत आ गए। और तब से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासित तिब्बत सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन अब ऐसी स्थिति बन गई है कि चीन दलाई लामा के चयन प्रक्रिया में हस्तछेप करने की लगातार कोशिश कर रहा है। 
चयन प्रक्रिया
दरअसल दलाई लामा को चुना नहीं ढूंढा जाता है। ऐसा माना जाता है कि दलाई लामा मृत्यु के बाद एक नए शरीर में प्रवेश कर जन्म लेते है। और इसकी खोज आध्यात्मिक संकेतों के आधार पर किया जाता है। यह भी देखा जाता है कि मृत्यु के दौरान दलाई लामा की दिशा किस और थी वहीं दाह संस्कार के दौरान धुएं की दिशा किस और थी। संस्था के वरिष्ठ भिक्षु उन संकेतों के आधार पर उस दिशा में दलाई लामा की तलाश के लिए निकलते हैं। उसके बाद कुछ बच्चों का चयन कर उनका परीक्षण किया जाता है और पूर्व दलाई लामा की चीजें पहचानने को दी जाती है, जो असाधारण बुद्धि वाला बच्चा इन चीजों को पहचान पाने में सफल हो जाता है उन्हें आधिकारिक रूप से दलाई लामा की उपाधि दी जाती है।