रांची
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन सोमवार को राजधानी रांची के डोरंडा स्थित हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार शाह बाबा की दरगाह पहुंचे। अवसर था, उर्स का 218वां सालाना जलसा, जिसे पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने यहां दरगाह पर चादरपोशी की और राज्य के सभी नागरिकों की सुख-समृद्धि, अमन-चैन, प्रगति और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी। इस दौरान दरगाह परिसर में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु मुख्यमंत्री के साथ शामिल हुए और बाबा से मन्नतें मांगीं। परंपरा का निर्वहन हर वर्ष उर्स के मौके पर दरगाह शरीफ में चादरपोशी की परंपरा निभाई जाती है।

मुख्यमंत्री ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए न सिर्फ अपनी श्रद्धा अर्पित की, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सूफी संतों और फकीरों की शिक्षा आज भी समाज को जोड़ने का काम करती है। मीडिया से बातचीत मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा, “हर वर्ष की तरह इस साल भी मैं उर्स के मौके पर दरगाह शरीफ पहुंचा हूं। आज मैंने यहां चादरपोशी कर रिसालदार शाह बाबा से प्रार्थना की है कि झारखंड वासियों के जीवन में खुशहाली, अमन-चैन और तरक्की बनी रहे। यह दरगाह आस्था और भाईचारे का प्रतीक है, यहां आकर मन को सुकून मिलता है।”

दरगाह का महत्व हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार शाह बाबा की दरगाह झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में लोगों की आस्था का केंद्र है। माना जाता है कि बाबा की दरगाह पर की गई दुआएं कबूल होती हैं। सालाना उर्स के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और वातावरण पूरी तरह कौमी एकता और भाईचारे का संदेश देता है। आज के कार्यक्रम में दरगाह कमेटी के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम लोग मौजूद रहे। दरगाह के सज्जादानशीन और अन्य जिम्मेदारों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें उर्स की बधाई दी।
