जमशेदपुर
साकची बाजार की भारी भीड़ में 9 दिन पहले बिछड़ी तीन वर्षीय मासूम आफरीन का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। सबसे ज्यादा दर्द उस लाचार पिता की आंखों में दिखाई देता है, जो एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद पिछले नौ दिनों से अपनी बच्ची की तलाश में शहर की गलियां नाप रहा है। हर गुजरते दिन के साथ परिवार की बेचैनी और दर्द बढ़ता जा रहा है। घर की चौखट पर टिकी निगाहें अब भी उस पल का इंतजार कर रही हैं, जब आफरीन दौड़ते हुए वापस अपनी मां की गोद में आ जाएगी।
खरीदारी के दौरान भीड़ में लापता हुई मासूम
दरअसल, मानगो के हयातनगर स्थित डिजना बस्ती निवासी मोहम्मद इम्तियाज 26 मई को बकरीद की खरीदारी के लिए अपनी पत्नी और बच्चों के साथ साकची बाजार आए थे। बाजार में अत्यधिक भीड़ होने के कारण तीन साल की मासूम आफरीन खातून अचानक परिवार से बिछड़ कर लापता हो गई।
दिव्यांग पिता लगा रहे मदद की गुहार
इस घटना के बाद से परिवार की जिंदगी मानो थम सी गई है। सबसे ज्यादा दर्द उस लाचार पिता की आंखों में दिखाई देता है, जो एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद पिछले नौ दिनों से अपनी बच्ची की तलाश में शहर की गलियां नाप रहा है। कभी थाने के चक्कर काटना, कभी बाजार की खाक छानना, तो कभी लोगों के सामने हाथ जोड़कर मदद की गुहार लगाना—इम्तियाज अपनी लाडली को ढूंढने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस खंगाल रही है सीसीटीवी फुटेज
परिजनों ने पहले अपने स्तर पर आफरीन की काफी खोजबीन की, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली तो उन्होंने साकची थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। लापता होने के समय आफरीन ने गुलाबी रंग की फ्रॉक पहन रखी थी और उसका रंग सांवला है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि इतना समय बीत जाने के बावजूद अब तक बच्ची का कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है, साकची बाजार और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, तथा बच्ची की तलाश में लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
परिजनों ने एसएसपी से की मुलाकात
बुधवार को परेशान परिजनों ने इस मामले को लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक (ACP) कार्यालय में मुलाकात की और बच्ची की जल्द से जल्द सुरक्षित बरामदगी की मांग की। परिवार का कहना है कि उनकी हर सुबह इस उम्मीद के साथ शुरू होती है कि आज उनकी बच्ची घर लौट आएगी, लेकिन शाम होते-होते उम्मीदें टूटने लगती हैं। आफरीन के गायब होने के बाद से उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है।