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4 माओवादी हथियार के साथ गिरफ्तार, लेवी और धमकी मामले में पुलिस ने की छापामारी

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द फॉलोअप डेस्क

25 जून को सेन्ट्रल कोल फिल्ड लिमिटेड के महाप्रबंधक कार्यालय में कार्यरत एक कर्मचारी से भाकपा माओवादी के कोयल शंख जोन कमिटी के सदस्य मनोज जी के नाम से एक करोड़ रुपये लेवी की मांग की गई थी। कर्मचारी को 02 जुलाई तक यह राशि नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। इस पर कर्मचारी ने खलारी थाना में लिखित आवेदन दिया, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई और माओवादी संगठन के खिलाफ कार्रवाई की गई।
कांड की गंभीरता को देखते हुए पुलिस SSP रांची चन्दन कुमार सिन्हा के आदेश पर पुलिस उपाधीक्षक, खलारी के नेतृत्व में एक छापामारी दल गठित किया गया। इस दल ने माओवादियों की गिरफ्तारी और कांड के उद्भेदन के लिए अभियान चलाया। इसी दौरान, 3 जुलाई की मध्य रात्रि को पुलिस को सूचना मिली कि भाकपा माओवादी के 04-05 सक्रिय सदस्य बक्सी बंगला चट्टी नदी के पास एकत्रित हुए हैं और व्यवसायियों, ठीकेदारों तथा ईट भट्ठा मालिकों से लेवी वसूलने के लिए योजना बना रहे हैं।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नदी के किनारे घेराबंदी की। माओवादी सदस्यों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें सशस्त्र बल की मदद से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार माओवादियों के पास से तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण सामग्री बरामद हुई। इनमें योगेन्द्र गंझू उर्फ पवन जी के पास से एक लोडेड देसी पिस्तौल और तीन जिंदा कारतूस, मुकेश गंझू के पास से एक रेडमी कंपनी का मोबाइल फोन और सिम, और मन्नु गंझू के पास से भाकपा माओवादी का लेटर पैड बरामद हुआ।

गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने माओवादी योगेन्द्र गंझू उर्फ पवन जी से पूछताछ की। उसने बताया कि वह वर्ष 2006 में भाकपा माओवादी संगठन में शामिल हुआ था और उसे गारू सरजु क्षेत्र का एरिया कमांडर बना दिया गया था। 2009 में उसे सब-जोनल कमांडर बना दिया गया। इस दौरान, वह कई बार पुलिस से मुठभेड़ में शामिल हुआ था। पवन जी ने यह भी बताया कि माओवादी संगठन के प्रमुख रविन्द्र गंझू के निष्क्रिय होने के बाद, उसने मुकेश गंझू, मन्नु गंझू और राजकुमार नाहक के साथ मिलकर क्षेत्र में फिर से पार्टी को सक्रिय किया और व्यवसायियों, ठीकेदारों और ईट भट्ठा मालिकों से लेवी मांगने लगा।
इसके अलावा, पवन जी ने खुलासा किया कि वह गारू (लातेहार) थाना क्षेत्र के कटीया जंगल में हुई पुलिस मुठभेड़ में शामिल था, जिसमें पुलिसकर्मी मारे गए थे। उसे सेन्ट्रल कमिटि सदस्य अरविन्द जी के कहने पर मृत पुलिसकर्मी के पेट में बम लगाने के लिए एक्सपर्ट के साथ कटीया जंगल भेजा गया था।


 

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