द पॉलोअप डेस्क
नशा मुक्त युवा, स्वस्थ समाज के संदेश के साथ राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मंगलवार को सदर अस्पताल, गुमला के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिले के 11 प्रखंडों से चार-चार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और एक-एक एसटीएस (सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर) ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तंबाकू और नशे की लत से मुक्त करना, शैक्षणिक संस्थानों (स्कूलों व कॉलेजों) के 100 गज के दायरे को लाल रंग से “तंबाकू निषेध क्षेत्र” घोषित करना, और प्रत्येक पंचायत एवं ग्राम को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए प्रेरित करना है।
यह विशेष जन अभियान उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देशानुसार 9 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 9 दिसंबर तक, यानी 60 दिनों तक जिलेभर में संचालित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत जन-जागरूकता रैलियां, पोस्टर प्रदर्शनी, दीवार लेखन, नुक्कड़ नाटक, शपथ ग्रहण कार्यक्रम और विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम का शुभारंभ सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर ने किया। कार्यक्रम में तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ. के. के. मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. अनुपम किशोर ने अपने संबोधन में कहा कि तंबाकू का सेवन शरीर के लिए धीमा जहर है, जो कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों की बीमारियों जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि यदि हम आज जागरूक नहीं हुए, तो हमारी आने वाली पीढ़ी गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझेगी। इसलिए हर व्यक्ति को इस मुहिम से जुड़ना चाहिए। वहीं, डॉ. के. के. मिश्रा ने कहा कि तंबाकू सेवन समाज के लिए महामारी की तरह फैल चुका है। इसे समाप्त करने के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग नहीं, बल्कि समाज के हर तबके की जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने कहा कि तंबाकू मुक्त समाज तभी संभव है जब हर व्यक्ति स्वयं इसके खिलाफ खड़ा हो और दूसरों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करे।
प्रशिक्षण की मुख्य प्रशिक्षक वंदना और सुमन पर्सनालिटी ने प्रतिभागियों को तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों, उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और सरकार द्वारा बनाए गए COTPA Act 2003 (सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट्स एक्ट) के नियमों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के भीतर तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है, और ऐसा करने वालों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से यह शपथ ली कि वे स्वयं तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहेंगे तथा अपने परिवार और समाज को भी इसके सेवन से रोकने का हर संभव प्रयास करेंगे। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी, कर्मचारी, प्रशिक्षक और प्रतिभागी उपस्थित रहे।
