द फॉलोअप, रांची
स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि रिम्स में एक करोड़ से ऊपर की सभी टेंडरों की उच्चस्तरीय जांच होगी, जो बगैर एसएफसी की स्वीकृति की निकाली गयी है। आज की बैठक में रिम्स में चिकित्सा उपकरणों की खरीद को लेकर भी कई निर्देश दिए गए। साथ ही कई मुद्दों पर अपर सचिव ने नाराजगी भी जतायी। बैठक में चिकित्सा उपकरणों की खरीद पर जब लागत का विवरण मांगा गया तो रिम्स प्रबंधन इसे उपलब्ध नहीं करा सका। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना कास्ट डिटेल के किसी भी खरीद प्रक्रिया की शुरुआत नियमों के खिलाफ है। बैठक में रिम्स के निदेशक सह सदस्य सचिव डॉ. राजकुमार, अपर निदेशक प्रशासन कृष्ण प्रसाद बाघमारे, संयुक्त सचिव छवि रंजन, एसटी-एससी सदस्य जगन्नाथ प्रसाद, डॉ अशोक प्रसाद सहित विभागीय अधिकारी और रिम्स के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में कुल 15 एजेंडों पर चर्चा की गई, जिसमें वित्तीय पारदर्शिता, अधोसंरचना विकास, चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधार प्रमुख रहे।

अपर सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि आगे से समिति की स्वीकृति के बाद ही टेंडर जारी होंगे और इस पूरे मामले को अगली गवर्निंग बॉडी की बैठक में रखा जाएगा। बैठक में सभी नए हॉस्टलों को 12 मंजिला बनाने का निर्णय लिया गया ताकि अधिक छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों को सुविधा मिल सके। अंडर ग्रेजुएट हॉस्टल के नवीनीकरण और पीजी हॉस्टल को पीपीपी मोड पर संचालित करने की संभावनाओं पर विचार करने का निर्देश दिया गया। तीन महीने में रिम्स को पूरी तरह कैशलेस और पेपरलेस बनाने का लक्ष्य दिया गया। चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकीकरण के तहत रोबोटिक सर्जरी को पीपीपी मोड पर शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने को कहा गया। साथ ही जेनेटिक बीमारियों के इलाज को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत संसाधन उपलब्ध कराने के लिए समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया।
