द फॉलोअप, रांची
सीआईडी ने JSSC-CGL परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी की जांच तेज कर दी है। जांच के क्रम में कई चौंकाउ तथ्य सामने आ रहे हैं। लगभग 300 ओएमआर सीट ऐसे मिले हैं, जो या तो खाली है या बहुत कम भरे हुए हैं। सीआईडी ने जांच के क्रम में जेएसएससी के उस सर्वर रूम को सील कर दिया है। अब सीआईडी उस सर्वर रूम से ओएमआर सीट को लेकर आगे की जांच करेगी। यह जानने की कोशिश करेगा कि इसके पीछे का खेल क्या था। इस प्रतियोगी परीक्षा में कुल 6.19 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। उनके ओएमआर इसी कमरे में है।

300 OMR की जानकारी ऐसे मिली
जानकारी के अनुसार सीआईडी ने जांच के क्रम में अभय तिवारी, उसका भाई अक्षय तिवारी और अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी से लंबी पूछताछ की है। मालूम हो कि तीनों ही जेपीएससी 14 वीं पीटी में भी उत्तीर्ण किया है। पूछताछ के क्रम में मिले सुराग के आधार पर सीआईडी ने पिछले दिनों जेएसएससी के सचिव सुधीर गुप्ता के आवास पर भी छापेमारी की थी। उनकी पत्नी और बच्चों का लैपटॉप तथा मोबाइल फोन जब्त किया था। उसको खंगालने के बाद सीआईडी की टीम पिछले दिनों जेएसएससी कार्यालय पहुंची। सीजीएल परीक्षा की ओएमआर सीट लेने का प्रयास किया। लेकिन जेएसएससी के अधिकारियों ने बताया कि उसका पासbर्ड उनके पास नहीं है। पासवर्ड आउट सोर्सिंग कंपनी बेवल के अधिकारी दे सकते हैं। बताते हैं कि दो दिन के बाद सीआईडी को कंपनी के अधिकारियों ने पासवर्ड उपलब्ध कराया। उसके बाद सीआईडी ने उस सर्वर रूम को सील कर दिया है।

अब सीसीटीवी फूटेज की हो रही जांच
अब सीआईडी जिस कमरे के कंप्यूटर में ओएमआर है, उसके सीसीटीवी फूटेज को खंगाल रही है। यह जानने की कोशिश में लगी है कि उस कमरे में कौन आता-जाता था। ओएमआर से कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गयी है। साथ ही पिछले सीजीएल की तरह प्रश्न पत्र लीक होने की संभावना को भी तलाश रही है। इसी क्रम में बेवल कंपनी के कोलकाता स्थित दफ्तर से कई दस्तावेज हासिल करने की कोशिश की गयी है। आने वाले दिनों में सीआईडी इस कंपनी के अधिकारियों से भी पूछताछ करेगी।
.jpeg)
12 ऐसे परिवार मिले, जिनसे दो या तीन अभ्यर्थी चयनित हुए
जांच के क्रम में 12 ऐसे परिवार भी मिले हैं, जिनसे दो या तीन अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। इनमें भाई-भाई, भाई-बहन जैसे रिश्ते हैं। ये एक ही माता-पिता के संतान हैं। अब परीक्षा के दिन सीसीटीवी फूटेज के माध्यम से उनकी गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। उससे पता चलेगा कि इन परिवारों का गैंगेस्टरों के साथ कोई कनेक्शन तो नहीं था। अभय तिवारी, उसका भाई अक्षय तिवारी सरीखे परिवार इसमें शामिल है।
