नंदलाल तुरी
महिला और बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार नीतीश्वर कुमार, उपायुक्त मनीष कुमार और उप विकास आयुक्त महेश कुमार संथालिया ने आज रवीन्द्र भवन परिसर से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान और मातृ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि इस रथ के माध्यम से महिलाओं और बच्चों की बेहतर सेहत सुनिश्चित करने हेतु लोगों को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी और उसके कारणों के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वह अवस्था होती है जिसमें मां या बच्चे की जान को खतरा हो सकता है, और इसका समय पर पहचान और उपचार आवश्यक है।
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मुख्य कारण:
18 वर्ष से कम उम्र में विवाह और गर्भावस्था
दो गर्भधारण के बीच 1 वर्ष से कम का अंतर
बार-बार गर्भधारण (लगातार 3-4 बार)
महिला में एनीमिया (खून की कमी) या कमजोरी
पहले बच्चे का कमजोर स्वास्थ्य या कम वजन
शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव जैसी बीमारियाँ (एनसीडी)
समय से पूर्व डिलीवरी
नवजात का वजन 2 किलोग्राम से कम होना
उपायुक्त ने बताया कि जिला प्रशासन मिशन मोड में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान करेगा और प्रभावित महिलाओं को पूरक पोषण, आयरन टैबलेट, एवं एनीमिया का उपचार उपलब्ध कराएगा। इसके अतिरिक्त, उन्हें नियमित काउंसलिंग के माध्यम से सुरक्षित गर्भावस्था के लिए मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, "हमारा उद्देश्य बच्चों, महिलाओं और विद्यार्थियों तक उपलब्ध सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान और उसका प्रभावी उपचार हमारे जिले में मातृ और शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा।"
