द फॉलोअप डेस्क
डिजिटल क्रांति के दौर में जहां देश बुलेट ट्रेन और स्मार्ट सिटी की बात कर रहा है, वहीं जामताड़ा जिले से विकास के दावों की पोल खोलती एक कड़वी तस्वीर सामने आई है। जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत आदिवासी बहुल गांव तेलिया बंधी में आजादी के 78 साल बाद भी आज तक एक पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है। करीब 300 घरों की आबादी वाला यह गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। गांव तक पहुंचने का एकमात्र जरिया 3 किलोमीटर का एक कच्चा रास्ता है। सामान्य दिनों में भी यह रास्ता पूरी तरह जर्जर और उबड़-खाबड़ रहता है। वहीं बरसात का मौसम आते ही यह सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि सबसे ज्यादा मुसीबत तब होती है जब रात के समय कोई अचानक बीमार पड़ जाता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना होता है।

जर्जर रास्ते के कारण गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती। ऐसे में लाचार होकर मरीजों को खटिया या डोली पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीण गोविंद टुडू, रोहन मरांडी, होपना टुडू, जितेंद्र हेंब्रम और मदन टुडू ने बताया कि चुनाव के समय नेताजी आते हैं और बड़े-बड़े वादे कर वोट ले जाते हैं। लेकिन जीतने के बाद कोई पलटकर गांव की सुध लेने नहीं आता। सड़क न होने का सबसे बुरा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। बारिश के दिनों में बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते। ग्रामीणों ने अब एक सुर में जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि उनकी सुध ली जाए और गांव में जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।
