द फॉलोअप डेस्क
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के बयान पर झामुमो के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पलटवार करते हुए उन्हें RAW का चीफ बनाने की बात कह दी है। उन्होंने कहा, "न देश के NSA अजीत डोभाल और CBI, NIA और इंटेलिजेंस और विजलेंस के चीफ बता सकते कि कौन सा DGP और अधिकारी किस क्रिमिनल के साथ कितने पैसे का लेनदेन करता है यह बाबूलाल मरांडी ही बता सकते है। यह दिव्य दृष्टि प्रदात उन्हें ही प्रदान है, जैसा महाभारत में संजय था वैसे ही कलयुग के संजय बाबूलाल मरांडी है। उनकी दिव्य दृष्टि बीच-बीच में खुलती है, जब कोई रिटायर हो जाता है तब उनकी तीसरी आंख खुलती है।"
बता दें कि बाबूलाल मरांडी ने सुप्रियो भट्टाचार्य के पलटवार के पहले एक प्रेस वार्ता की थी। तब उन्होंने राज्य सरकार पर बड़ा निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, "अवैध डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति हेमंत सरकार ने गिव एंड टेक फार्मूले के आधार पर किया था। हेमंत सोरेन को अवैध बालू, कोयला, पत्थर, शराब के काले धन का साम्राज्य चलाने के लिए अनुराग गुप्ता जैसा बदनाम, टेस्टेड और वर्दीवाला गुंडा अपराधी चाहिए था। अनुराग गुप्ता की एक एसपी के रूप ने ख्याति रही थी। मगध यूनिवर्सिटी में इनका डिग्री घोटाला भी कम नहीं है। अनुराग गुप्ता का अवैध तरीके से डीजीपी बनने का रिश्ता काला धंधा और राजनीतिक संरक्षण के समीकरण पर टीका था।"
उन्होंने आगे कहा था, "पूरा मामला भारत माला प्रोजेक्ट पर वर्चस्व की लड़ाई और सुजीत सिन्हा के कोयलांचल शांति समिति से जुड़ा हुआ है। इस पूरे खेल में पेटी टेंडर, स्टोन चिप्स, जमीन दलाली, और अन्य अवैध कारोबारों के जरिए एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की योजना से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट पर नियंत्रण के लिए अनुराग गुप्ता ने सुजीत सिन्हा को चुना था। जिसमें अनुराग गुप्ता की 40% हिस्सेदारी थी।"
इसके अलावा बाबूलाल मरांडी ने अमन साहू का फर्जी इनकाउंटर को भी स वर्चस्व की लड़ाई का हिस्सा बताया। उन्होंने बताया कि जानकारी मिली है कि सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद बड़े रहस्य उजागर हुए हैं। अनुराग गुप्ता और रिया सिन्हा के वाट्सअप चैट में अमन साहू के एनकाउंटर के लिए पैसों के लेनदेन और रंगदारी वसूली का पूरा हिसाब किताब दर्ज है। चैट से यह स्पष्ट हो गया है कि अनुराग गुप्ता ही कोयलांचल शांति समिति का किंगपिन है।"
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस मामले में घेरते हुए कहा, "जानकारी के मिलने के बाद भी अवैध डीजीपी अनुराग गुप्ता को हटाने के लिए मुख्यमंत्री ने पहल नहीं की बल्कि अवैध कमाई में मुख्यमंत्री का हिस्सा नहीं पहुंचने के कारण हेमंत सोरेन की किचेन कैबिनेट में झगड़ा हुआ जिसके कारण अवैध डीजीपी को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। रिया सिन्हा ने पूछताछ में यह खुलासा किया है कि सुजीत सिन्हा जेल से ही कारोबारियों से रंगदारी मांगता था, और प्रिंस खान के जरिए धमकाने का काम करता था।"
बता दें कि 13 अक्टूबर 2025 को रिया सिन्हा और अन्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया जिसके पास से तीन पिस्टल, सात मैगजीन, 13 गोलियां, एक कार और मोबाइल बरामद हुए थे। बीते दिनों पाकिस्तान से ड्रॉन के जरिए पंजाब में हथियार लाने और इसे झारखंड में लाने और अपराधिक घटनाओं को घटित करने का मामला भी सामने आया था। इसके खिलाफ रांची पुलिस ने कार्रवाई भी की थी। इसी घटनाओं को जोड़ते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा, "पाकिस्तान से ड्रॉन के जरिए 21 विदेशी हथियार झारखंड मंगवाए गए। सुजीत सिन्हा, प्रिंस खान ने एक खतरनाक गठजोड़ बनाया था जिसे रिया सिन्हा संभाल रही थी। राजधानी रांची में हाल के दिनों में रंगदारी कॉल्स इसी गठजोड़ का नतीजा था। पाकिस्तान से ड्रॉन के जरिए मोगा पंजाब के रास्ते आए हथियारों से यह गैंग देश भर में कारोबारियों को धमका कर वसूली करता था।"
उन्होंने आगे कहा, "अनुराग गुप्ता दो विभागों सीआईडी और एसीबी के डीजी थे। सीआईडी में जमीन के जांच के लिए एसआईटी बनाया गया था, जिसमें याचिकाएं मंगाई जाती थी, स्वतः संज्ञान लेकर फाइल खोलते थे। एसएसपी दीपक कुमार इस लूट में दाहिने हाथ की भूमिका में थे। डीएसपी अमर पांडे ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच के नाम पर गुमनाम पिटीशन के द्वारा लोगों को खूब लूटा गया। यह लुटेरी टीम इतनी बेलगाम हो गई कि मुख्यमंत्री से जुड़े लोगों तक को धमकाने, वसूली करने लगी। ऐसे में मामला प्रकाश में आने पर आनन फानन में अमर पांडे पर नकेल कसा गया, नेक्सस टूट जाए, और बात दबी रह जाए इसलिए दीपक कुमार को सिंगल नोटिफिकेशन द्वारा सीआइडी से हटाकर मोहनपुर कमांडेंट बनाकर भेजा गया, फिर अनुराग गुप्ता को हटाया गया।"

अंत में बुलाल मरांडी ने कहा, "झारखंड में इस प्रकार सत्ता के संरक्षण में बढ़ते अपराध, लूट और भ्रष्टाचार की कहानी हेमंत सरकार की सच्चाई है। उन्होंने कहा कि इन सारे मामलों की जांच एनआईए से कराने के लिए वे पत्र लिखेंगे और विस्तृत जांच की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री में हिम्मत है तो अनुराग गुप्ता के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराएं।"