द फॉलोअप डेस्क
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रो आदित्य साहु ने निकाय चुनाव में सरकार पर तिकड़म और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि सरकार के लाख तिकड़म और षडयंत्र के बाद भी सत्ताधारी गठबंधन की हार हुई। बड़ी संख्या में वार्ड से लेकर नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में हमारे विचारधारा वाले कार्यकर्ताओं की जीत हुई। हालांकि भाजपा के बागियों के विरुद्ध कार्रवाई पर वह चुप्पी साध गए। यह कह कर सवाल टाल दिया कि पार्टी की अनुशासन समिति की रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने दुहराया कि राज्य सरकार निकाय चुनाव कराना ही नहीं चाहती थी। भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिस प्रकार न्यायालय में निकाय चुनाव के लिए संघर्ष किया और पार्टी ने भी सड़क से सदन तक आंदोलन किया, उसका परिणाम है कि आज निकाय चुनाव झारखंड में संपन्न हुए। उन्होंने आज फिर दुहराया कि ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने का निर्णय खुल्लम खुल्ला मतदान को प्रभावित करने की कोशिश थी, जो पूरी तरह सच साबित हुआ। रांची नगर निगम चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार रोशनी खलखो सहित अन्य उम्मीदवारों का लगभग 40 हजार वोट रद्द होना यह साबित करता है कि राज्य सरकार ने भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को हराने के लिए कैसे चक्रब्यूह रचा था। प्रचार की समाप्ति के बाद खुलेआम नोटों के बंडल बांटे गए।

प्रदेश अध्यक्ष ने इन सवालों का भी सीधा जवाब नहीं दिया, जिसमें उनसे पूछा गया था कि धनबाद में संजीव सिंह और विधायक रागिनी सिंह में कौन भाजपा के विचारधारा वाले हैं। पाकुड़ जिला परिषद अध्यक्ष पद पर जीती सबरी पॉल को अब पार्टी बधाई दे रही है जबकि 12 फरवरी को बागी बनने पर उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। पहले की तुलना में इस बार भाजपा की जीत का प्रतिशत क्या रहा। जमशेदपुर में पार्टी के बड़े बड़े कद्दावर नेताओं के रहने के बाद मानगो नगर निगम में भाजपा की हार क्यों हुई।
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