द फॉलोअप डेस्क
बोकारो जिले में भर्रा कब्रिस्तान से मिले मानव कंकाल की पहचान को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। चीराचास पुलिस ने सदर अस्पताल में लापता खालिक अंसारी के माता-पिता का ब्लड सैंपल लेकर डीएनए जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब कंकाल और परिजनों के ब्लड सैंपल का मिलान कर यह स्पष्ट किया जाएगा कि बरामद अवशेष खालिक अंसारी के ही हैं या नहीं।

दो आरोपी जेल भेजे गए, हत्या की आशंका मजबूत
इस मामले में भर्रा निवासी सलाउद्दीन और गुड्डू को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। बताया जा रहा है कि मृतक खालिक अंसारी मिस्त्री का काम करता था और गुड्डू उसके साथ काम करता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों ने ही खालिक की हत्या कर शव को कब्रिस्तान में दफनाने की बात स्वीकार की है। हालांकि इस मामले में एक मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी अभी बाकी है।

2022 से लापता था खालिक
खालिक अंसारी वर्ष 2022 से लापता था और वह भर्रा में किराए के मकान में रहता था। उसके लापता होने पर परिजनों ने चीराचास थाना में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला। बाद में परिजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद अदालत की फटकार के बाद पुलिस सक्रिय हुई और सलाउद्दीन व गुड्डू को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पूछताछ में कब्रिस्तान में शव दफनाने की बात सामने आई, जिसके बाद कंकाल बरामद किया गया।

पुलिस की चुप्पी पर उठे संदेह
परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पूरी जांच प्रक्रिया गोपनीय तरीके से की जा रही है और पुलिस आरोपियों का पक्ष ले रही है। साथ ही परिजनों ने कहा कि जब तक डीएनए रिपोर्ट नहीं आती, तब तक यह कैसे माना जा सकता है कि कंकाल खालिक का ही है। वहीं पुलिस की ओर से इस संवेदनशील मामले पर सार्वजनिक बयान या प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की जा रही है, जिससे कई तरह की शंकाएं और सवाल खड़े हो रहे हैं।