द फॉलोअप डेस्क
पलामू में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में राष्ट्रीय परशुराम सेना भार्गव के संस्थापक सदस्य और समाज के सक्रिय युवा राहुल पाठक की मौत ने पूरे ब्राह्मण समाज को गहरे शोक और स्तब्धता में डाल दिया है। शादी के महज एक दिन बाद हुई इस दुर्घटना ने परिवार, मित्रों और पूरे समाज को भीतर तक झकझोर दिया है। इसी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए मेदिनीनगर के रेडमा स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर परिसर में भार्गव सेना के बैनर तले श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहां भारी संख्या में लोग राहुल को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी, परशुराम सेना भार्गव के संस्थापक अमित तिवारी, मुकेश तिवारी, अभिषेक तिवारी, मधुकर शुक्ला, आशुतोष तिवारी, संजीत पांडेय, अरविंद पांडेय, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता विजय तिवारी, युवा समाजसेवी आशीष भारद्वाज, जेजेए पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष नितेश तिवारी, अर्जुन पांडेय उर्फ गुरु पांडेय, देवेंद्र तिवारी, चंदन तिवारी, पिंकू तिवारी सहित समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे। सभी की आंखें नम थीं और माहौल पूरी तरह गमगीन था।
कार्यक्रम की शुरुआत राहुल पाठक की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। कई लोग अपने भावों पर नियंत्रण नहीं रख सके और रो पड़े। मौके पर पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी ने कहा कि यह अत्यंत दुखद घटना है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। शादी के एक दिन बाद ऐसी दुर्घटना का होना पूरे समाज को भीतर तक हिला देने वाला है। परशुराम सेना भार्गव के संस्थापक अमित तिवारी ने भावुक होते हुए कहा कि राहुल का जाना ऐसा है जैसे संगठन का एक मजबूत कंधा टूट गया हो। यह नुकसान सिर्फ संगठन का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जिसने राहुल को जाना और उनके साथ काम किया।
सभा में उपस्थित लोगों ने राहुल की सरलता, विनम्रता और मिलनसार स्वभाव को भावपूर्ण शब्दों में याद किया। वे समाजसेवा में सदैव अग्रणी भूमिका निभाते थे और उनकी सहज मुस्कान हर किसी का दिल जीत लेती थी। उनके असमय निधन से परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है, वहीं समाज ने एक ऊर्जावान और संस्कारी युवा को खो दिया है। सभा के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुख से उबरने की शक्ति देने की प्रार्थना की। मेदिनीनगर में राहुल पाठक को दी गई यह अंतिम विदाई समाज के लिए एक अविस्मरणीय पीड़ा बनकर सदैव याद रखी जाएगी।