द फॉलोअप डेस्क
छतरपुर पुलिस ने फिल्मी स्टाइल में घेराबंदी कर पांच साल पुराने हत्या मामले के आरोपी चितरंजन यादव उर्फ सीके यादव को गिरफ्तार किया और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। थाना प्रभारी प्रशांत प्रसाद ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि 5 जून 2020 को बाघामाडा गांव में बिजली का तार लगाने को लेकर हुए विवाद में चितरंजन यादव ने गांव के ही सीता भुइयां की हत्या कर शव को झाड़ी में फेंक दिया था। मृतक के बड़े भाई नरेश भुइयां के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद से चितरंजन फरार था।
प्रभारी ने बताया कि गुरुवार को चितरंजन स्कॉर्पियो पर सवार होकर पुलिस को चकमा देकर मेदिनीनगर की ओर भाग गया, लेकिन नाकाबंदी के बाद वह फिर छतरपुर की ओर लौटने पर घेर कर गिरफ्तार कर लिया गया। चितरंजन यादव छतरपुर के रामगढ़ स्थित बाल विकास रेसिडेंशियल स्कूल चलाता था और उसने कुछ दिन पहले अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराकर कुछ व्यक्तियों को फंसाने की साजिश रची थी। मामले में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था, लेकिन उसने न्यायालय से जमानत प्राप्त कर ली थी।
चितरंजन ने 14 जून को कचनपुर गांव के टोला गटीघाट निवासी महेंद्र यादव की पत्नी तेतरी देवी के माध्यम से अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें गांव के ही सुनील यादव, वीरेंद्र यादव और अन्य चार लोगों को आरोपी बनाया था। थाना प्रभारी प्रशांत प्रसाद ने एसआई सुशील उरांव और एएसआई राजीव कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित की, जिसने मामले की जांच शुरू की। अनुसंधान में यह सामने आया कि महेंद्र यादव का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि चितरंजन और कचनपुर निवासी पप्पू कुमार ने महेंद्र को कउवल गांव में एक रिश्तेदार के घर छिपाकर अपहरण की साजिश रची थी, ताकि उन पर आरोप मढ़ा जा सके।
पप्पू यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद महेंद्र को सुरक्षित बरामद कर लिया गया और पप्पू यादव को झूठी अपहरण साजिश रचने के आरोप में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। चितरंजन की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही थी, लेकिन वह फरार हो गया था। बाद में पुलिस को उसकी सूचना मिली और उसे गिरफ्तार कर लिया। इस अभियान में थाना प्रभारी प्रशांत प्रसाद, अवर निरीक्षक सुशील उरांव, अनिल कुमार रजक, धनश्याम मिश्रा, राजीव कुमार समेत पुलिस के अन्य जवान शामिल थे।
