द फॉलोअप डेस्क
देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी। मामला लखीसराय में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से जुड़ा था। अदालत ने इस मामले में पहले ही सख्त रुख अपनाया था और इसकी सुनवाई भी चल रही थी। अदालत ने सभी राज्यों को एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स के अनुपालन को लेकर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। आदेश का अनुपालन नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना और पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। ऐसे में सभी अधिकारी कोर्ट के समक्ष पेश हुए और हलफनामा समय पर दाखिल नहीं करने पर अदालत से माफी मांगी।
दरअसल, एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स के पालन को लेकर हलफनामा दाखिल न करने पर कोर्ट ने सवाल उठाया था। कोर्ट ने सभी मुख्य सचिवों की माफी स्वीकार कर ली और आगामी तारीखों में व्यक्तिगत रूप से पेशी से छूट दे दी, लेकिन यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में यदि ऐसी चूक दोबारा हुई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष पेश हुए अधिकारियों ने बताया कि आदेश के अनुसार हलफनामे दाखिल कर दिए गए हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दे दी और अगली सुनवाई की तारीख 7 नवंबर तय की है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि वह सरकारी भवनों और परिसरों में कुत्तों को खाना खिलाने पर निगरानी के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी। पीठ ने टिप्पणी की कि कई बार सरकारी कर्मचारी स्वयं कुत्तों को बढ़ावा देते हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। कोर्ट ने कहा कि इस पर रोक लगाने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे।
बता दें कि 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को तलब किया था। उस समय केवल पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली नगर निगम ने ही हलफनामा दाखिल किया था। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि नोटिस सभी को भेजा गया था, फिर भी कई राज्यों की ओर से कोई प्रतिनिधि तक नहीं आया। ऐसे में 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी गलती हुई तो मुख्य सचिवों को फिर से बुलाया जाएगा। गौरतलब है कि कोर्ट ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने कुत्ते के काटने से पीड़ित लोगों के हस्तक्षेप आवेदनों को भी मंजूरी दे दी। उन्हें कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा राशि देने से छूट दी गई है, जबकि कुत्तों के पक्ष में हस्तक्षेप करने वाले व्यक्तियों को 25 हजार रुपये और एनजीओ को 2 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने पीड़ितों की बात सुनने का फैसला किया है और पूरा मामला 7 नवंबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। सुप्रीम कोर्ट का जोर इस बात पर है कि आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स का सख्ती से पालन किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने संकेत दिया है कि सरकारी इमारतों और परिसरों में कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक लगाने के आदेश जल्द जारी किए जाएंगे।
